फिर ठंडे बस्ते में पुलिस कमिश्नर प्रणाली और जन सुरक्षा विधेयक

police demo mp 10 04 2018आईएएस और आईपीएस अफसरों के बीच अधिकारों की लड़ाई के बीच इंदौर और भोपाल में लागू होने वाली कमिश्नर प्रणाली एक बार फिर ठंडे बस्ते में जा सकती है। कमिश्नर प्रणाली लागू करने के प्रस्ताव पर चर्चा फिलहाल रुक गई है। वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए लाया जा रहा जनसुरक्षा विधेयक का मसौदा भी चर्चा के लिए वरिष्ठ सचिव समिति के पास नहीं पहुंचा है।
राज्य सरकार के एक उच्च पदस्थ अधिकारी के मुताबिक फिलहाल इंदौर और भोपाल में कमिश्नर प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया है और फिलहाल इस प्रस्ताव पर ब्रेक लग गया है। इसकी बड़ी वजह अधिकारियों के एक धड़े का विरोध है। मुख्यमंत्री ने गृह विभाग को प्रस्ताव तैयार कर मसौदा विधि विभाग को भेजने के निर्देश दिए थे, लेकिन गृह विभाग ने अब तक मसौदा तैयार नहीं किया है।
गौरतलब है कि दोनों शहरों में कमिश्नर प्रणाली लागू करने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्य सचिव ने कहा था कि बिना अध्ययन कमिश्नर प्रणाली लागू नहीं करना चाहिए। इसके बाद से ही इसे लेकर आईएएस और आईपीएस लॉबी आमने-सामने आ गई। मुख्यमंत्री ने कई बार कमिश्नर प्रणाली पर गंभीरता से विचार करने की बात कही थी।
1920 में इंदौर में रही है ऐसी ही व्यवस्था
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक आजादी के बाद मप्र के किसी शहर में भले ही कमिश्नर प्रणाली लागू नहीं हुई हो, लेकिन करीब 98 साल पहले इंदौर में इसी तरह का सिस्टम काम कर चुका है। बताया जाता है कि 1920 से 1922 के बीच इंदौर में ऐसी व्यवस्था के दस्तावेज पुलिस को मिले हैं।
नहीं हुआ कोई अध्ययन
पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लेकर गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा था कि जिन शहरों में यह व्यवस्था लागू है उनका अध्ययन कराया जा रहा है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने ऐसे किसी अध्ययन से इंकार किया है। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार के पास सुझाव आते हैं तो उन पर विचार किया जाता है। पुलिस कमिश्नर सिस्टम पर भी विचार चल रहा है।