प्राण घातक हमले से उवरे संजय बेचैन की जानदार हूंकार 

-प्रसंगवस/राजकुमार शर्मा राजू
शिवपुरी ब्यूरो। सहरिया आदिवासियों के सम्मान में, संजय बेचैन फिर मैदान में। यह नारा आज शहर के मुख्य मार्गों पर यथार्थ था। सहरिया आदिवासियों का विशाल रैला अपने नायक के साथ कदम से कदम मिलाकर यह जानदार हूंकार भरता नजर आ रहा था कि हमारा शोषण न सिर्फ अतीत बनना चाहिए बल्कि हमारे वर्तमान में हमारी बेहतरी के बीज होने चाहिए जो भविष्य में हमारे महानायक संजय बेचैन के नेतृत्व में नया कीर्तिमान रच दें। जिसके सुनहरे अक्षरों में सहरिया आदिवासियों को भविष्य में सम्मानजनक जीवन के साथ-साथ मुख्य धारा भी मिलनी चाहिए। सनद रहे! शोषित वंचित सहरिया आदिवासियों को सम्मानजनक जीवन का अधिकार दिलाने के लिए अपना खून पसीना बहाने वाले संजय बेचैन को जान से मारने की नीयत से उन पर षड्यंत्र पूर्वक प्राण घातक हमला किया गया था। इस हमले में मूर्क्षित हुए संजय बेचैन की हालत तत्समय न सिर्फ नाजुक थी बल्कि वह लम्बे समय तक पूरी तरह बैड रेस्ट पर रहे। संजय बेचैन के स्वास्थ्य को लेकर अंचल की सहरिया आदिवासी जमात प्रार्थना में रही और उनकी दुआओं का यह परिणाम था कि आज उनके लिए अपना खून पसीना बहाने वाला संजय बेचैन एक बार फिर से उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा था। संजय बेचैन के नेतृत्व में शहर के मुख्य मार्गों से निकली एक बड़ी रैली में यह संदेश बार-बार प्रतिध्वनित हो रहा था कि सहरिया आदिवासी असहाय नहीं है! निर्वल नहीं है उनका बल उनका बेचैन पूरी दमदारी से उनके साथ फिर से खड़ा है। परमात्मा ने निरीह-असहायों (सहरिया आदिवासी) की प्रार्थना स्वीकार कर बरदान में उन्हें आज का दिन दे दिया है जिसमें उनका अपना नायक पूरी दमदारी के साथ न सिर्फ उनके साथ खड़ा है बल्कि उनके हक के लिए जानदार हूंकार भी भरकर यह संदेश सार्वजनिक कर रहा है कि वह किसी भी कीमत पर सहरिया आदिवासियों का शोषण और उनके साथ अन्याय नहीं होने देगा। आज जो विशाल रैला संजय बेचैन के नेतृत्व में निकला है उससे निम्न तथ्य बहुत हद तक प्रमाणित हो रहा है कि संजय बेचैन ने सहरिया आदिवासियों के लिए जो अपना खून बहाया है वह गर्द (मिट्टी) में मिलकर गुलाल हो गया है जिसकी लाली सहरिया और संजय बेचैन के चेहरे पर निष्पक्षता के भाव से देखी जा सकती है।