दूसरे प्रतिभागी तेजस्वी ठाकुर ने प्रेम पर कविता पढ़ते हुए कहा कि हम दोनों में बस इतना फासला है। न तुझमें हौसला है, न मुझमें हौसला है। मुहम्मद मामून ने पिता के जीवन पर आधारित कविता प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि वो आज भी टूटे हुए चश्मे से अखबार पढ़ने का लुत्फ उठाते हैं, क्योंकि मेरे पापा आज भी पैसे बचाते हैं। इसके अलावा एस.योगेश्वर शांतनु, श्वेता रानी, शिवाली, निसर्ग, सुमैय्या सहित अन्य प्रतिभागियों ने अपनी कविता से सभागार में उपस्थित निर्णायकों एवं अन्य लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
-परिधानिका प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र बन गई
सांस्कृतिक कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आरती सारंग ने बताया कि विश्वविद्यालय के प्रतिभा आयोजन में पहली बार शामिल हुई परिधानिका प्रतियोगिता सबके आकर्षण का केंद्र बन गई। परिधानिका के माध्यम से प्रतिभागियों ने भारत के विभिन्ना राज्यों की वेशभूषा और संस्कृति को प्रदर्शित किया। प्रतिभागियों ने आयोजन स्थल पर लघु भारत को साकार कर दिया। कोई जम्मू-कश्मीर की वेशभूषा में आया, तो कोई बंगाली साड़ी और कुर्ता-पायजामा पहनकर आया। किसी ने राजस्थानी रंगों को साकार किया, तो किसी ने केरल की सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया। आयोजन में पूर्वोत्तर राज्यों की भी झलक दिखाई दी। इसके साथ ही एकल गायन प्रतियोगिता में भी प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा प्रदर्शन किया। रंगोली प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने रंगों के संयोजन से भारतीय नववर्ष को प्रकट किया।प्रतिभा में प्रश्नोत्तरी (क्विज) प्रतियोगिता दो स्तरों पर आयोजित की गई। स्नातक और स्नातकोत्तर।
-आज के कार्यक्रम
प्रतिभा-2018 में शुक्रवार को एकल वाद्य, एकल अभिनय, समूह गायन और माइम की प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। यह प्रतियोगिताएं प्रातः 9 से सायं 5 बजे तक आयोजित की जाएंगी।

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