पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली -डोकलाम प्रकरण के बाद भारत और चीन के रिश्तों में सीमा को लेकर जो तनाव घुला था उसे दूर करने की कोशिशें दोनों तरफ से फिर होने लगी हैं। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद शांतिपूर्ण तरीके से हल के लिए गठित समूह की बैठक गुरुवार को नई दिल्ली में हुई। इसमें भारत ने साफ कहा कि दोनों देशों के रिश्तों को दूसरे क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय सीमा पर शांति बनाए रखना बेहद जरूरी है।

विदेश मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, भारत-चीन सीमा विवाद पर विचार व समन्वय पर कार्यकारी व्यवस्था (डब्लूएमसीसी) की 11वीं बैठक गुरुवार को हुई। भारतीय पक्ष की अगुआई विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव प्रणय वर्मा ने की, जबकि चीन के दल की अगुआई वहां के विदेश मंत्रालय के सीमा विभाग के महानिदेशक यी शियालियांग ने की। बातचीत बेहद अच्छे माहौल में हुई।
दोनों पक्षों ने सीमा प्रबंधन को लेकर अपने-अपने विचार सामने रखे। बैठक में सीमा पर शांति व सद्भाव बढ़ाने के लिए और क्या-क्या किया जाए, इसको लेकर कई विकल्पों पर विचार हुआ। यह भी सहमति बनी कि सुरक्षा बलों के लोगों को एक दूसरे के यहां ज्यादा से ज्यादा यात्रा करने की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि उनके बीच आपसी समझ विकसित हो सके और वे एक दूसरे की भावना समझ सकें। इससे द्विपक्षीय बातचीत को भी आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
बता दें कि डब्लूएमसीसी की स्थापना 2012 में हुई थी। इसकी 10वीं बैठक दिसंबर, 2017 में चीन में हुई थी। कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, डोकलाम के बाद दो बार इस बैठक के आयोजन का मतलब है कि दोनों देश सीमा विवाद सुलझाना चाहते हैं। हाल के कुछ दिनों में दोनों पक्षों की तरफ से रिश्ते सुधारने को लेकर काफी उत्साहजनक बयान भी आए हैं। इसी कड़ी में भारतीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के चीन जाने की तैयारियां भी चल रही हैं।

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