भर्ती में दो तरह के आरक्षण नियम, बढ़ी नाराजगी

पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल -गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) भोपाल समेत प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया विवादों से घिर गई है।
Image result for आरक्षणसह प्राध्यापक व प्राध्यापक के पदों में सीधी भर्ती के साथ ही पदोन्नति का आरक्षण नियम भी लगा दिया गया है। जिससे ज्यादातर पद अनारक्षित श्रेणी में चले गए हैं। इससे दूसरी श्रेणी के दावेदारों में नाराजगी बढ़ गई है। अब वे हाईकोर्ट की दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं।
प्रदेश में सात नए मेडिकल कॉलेजों व छह पुराने कॉलेजों के लिए शिक्षकों के पद पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। पहले इन पदों में सहायक प्राध्यापक के पद पर सीधी भर्ती की जाती थी, जबकि सह प्राध्यापक व प्राध्यापक के पद पदोन्नति से भरे जाते थे। तीन महीने पहले बने नए भर्ती नियमों के तहत सभी कॉलेजों में साधी भर्ती विज्ञापन जारी किए गए। इसमें आरक्षण के नियम भी सीधी भर्ती के लागू करने की बात कही गई थी। बुधवार को चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में पदोन्नति के आरक्षण नियम सीटों के बंटवारे में लागू करने की बात कही। इसके बाद जीएमसी समेत कुछ कॉलेजों ने संशोधित विज्ञापन जारी किया। ज्यादातर पद अनारक्षित श्रेणी में जाने से विरोध के स्वर उठने लगे।
उदाहरण के तौर पर जीएमसी के पीडियाट्रिक विभाग में प्रोफेसर के तीन पद हैं। एक पद सीधी भर्ती से भरा जा रहा है। इसमें सीधी भर्ती का आरक्षण लागू होने से यह पद अनारक्षित के लिए चला गया। प्रोफेसर के दो अन्य पदों में पदोन्नति में आरक्षण का नियम लगाने से दो ओर पद अनरिजर्व श्रेणी में चले गए। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग का तर्क है कि सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार ही भर्ती की जा रही है।
यह उठ रहे सवाल
-पदोन्नति में आरक्षण का केस सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में सीधी भर्ती में पदोन्नति का आरक्षण का नियम लागू नहीं किया जाना चाहिए।
- पदों पर साीधी भर्ती का और पदोन्नति का आरक्षण नियम एक साथ लागू किया किया जा रहा है।
- भर्तियों में 14 साल से सहायक प्राध्यापक का काम कर रहे शिक्षक की जगह कम अनुभव वाले की भर्ती की उम्मीद है।
यह है आरक्षण का नियम
ए श्रेणी के पदों के लिए पदोन्नति में आरक्षण नियम नहीं है, लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग में इन पदों पर भी पदोन्नति में आरक्षण दिया जा रहा था। आरक्षण रोस्टर इस तरह था कि प्राध्यापक के दो पद पहले अनारक्षित श्रेणी से भरे जाते थे। इसके बाद एक पद एससी श्रेणी से। इसके बाद फिर दो पद अनारक्षित श्रेणी से फिर एक पद एसटी श्रेणी से भरा जाता था। सीधी भर्ती में आरक्षण का नियम अलग है। प्राध्यापक का एक पद अनारक्षित श्रेणी से भरने के बाद एक एससी श्रेणी से। इसके बाद एक पद अनारक्षित श्रेणी से भरने के बाद एक एसटी श्रेणी से भरा जाता है।
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भर्तियों में पारदर्शिता होनी चाहिए। सीधी भर्ती या पदोन्नति में से किसी एक का ही आरक्षण रोस्टर लागू करना चाहिए।
डॉ. राकेश मालवीय
सचिव, मप्र मेडिकल टीचर्स एसो.