कलेक्टरों की चेतावनी- आंदोलनों में कूदे तो करेंगे ब्रेक इन सर्विस की कार्रवाई

Image result for manthannews.in photoमंथन न्यूज़ भोपाल -10 अप्रैल को देशव्यापी संभावित बंद को लेकर सरकार ने कमर कस ली है। शासकीय सेवकों को चेतावनी दी गई है कि किसी भी प्रकार के धार्मिक व सामाजिक आंदोलनों में शामिल हुए तो ब्रेक इन सर्विस की कार्रवाई की जाएगी। यानी बंद या आंदोलन में संलिप्त मिलने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की सेवा को ब्रेक इन सर्विस माना जाएगा। इसके कारण कर्मचारियों की वरिष्ठता का नुकसान होगा। इसके कारण उन्हें समय-समय पर मिलने वाले लाभों से वंचित रखा जाएगा। शनिवार को देवास समेत प्रदेश के कई कलेक्टरों ने इस तरह के निर्देश जारी कर दिए हैं। इधर राजधानी भोपाल में कर्मचारी संगठनों की रैली पर भी रोक लगा दी है। धरना प्रदर्शन और आंदोलनों की अनुमति भी मुश्किल से दी जा रही है। जिन संगठनों ने पहले से अनुमति ले रखी हैं उनके आंदोलन पुलिस की कड़ी निगरानी में होंगे।
बता दें कि 2 अप्रैल को एससी-एसटी समाज व कर्मचारी संगठनों ने देशव्यापी बंद बुलाया था। इसमें हिंसा हुई थी। इसके बाद ही बाकी की कुछ समाजों द्वारा 10 अप्रैल को बंद की चेतावनी दी है। इसे लेकर सरकार अलर्ट हैं। विभाग प्रमुख कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों से पूछ रहे हैं कि वे बंद में शामिल तो नहीं होंगे। दूसरी तरफ पुलिस भी सामाजिक संगठनों से एक-एक कर चर्चा कर रही है। साथ ही बंद में शामिल न होने की समझाईश दी जा रही है।
सरकार ने झोंकी कर्मचारी संगठनों को मनाने में ताकत
सूत्रों की माने तो 10 अप्रैल के संभावित बंद को विफल बनाने के लिए हर तरह से कोशिश की जा रही है। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को कहा जा रहा है कि 10 अप्रैल या इसके आसपास धरना प्रदर्शन न करें। क्योंकि असामाजिक तत्व शांतिपूर्वक आंदोलन में खलल डाल सकते हैं। इसका गलत असर होगा। शांति प्रभावित हो सकती है। हालांकि की सरकार द्वारा की जा रही मनाने की कोशिशों से कर्मचारी मानने को तैयार नहीं है। राज्य निर्माण विभाग कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष शंकर सिंह सेंगर ने रविवार पत्रकार वार्ता कर 11 अप्रैल को राजधानी में बड़े आंदोलन की चेतावनी दे दी है। उनका कहना है कि 2015 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सरकार ने नहीं माना और हजारों दैनिक वेतन भोगियों को स्थाईकर्मी बना दिया गया। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने दैवेभो को नियमित कर्मचारी की तरह लाभ देने की बात कही थी।
ये संगठन पहले ही दे चुके हैं चेतावनी
- छह कर्मचारी संगठनों ने लिपिकों की वेतन विसंगति समेत अन्य कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर 12 व 13 अप्रैल को मंत्रालय के सामने हड़ताल की चेतावनी दी है।
- 28 कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मोर्चा ने 17 अप्रैल को विंध्याचल भवन के सामने विरोध प्रदर्शन करने का अल्टीमेटम दिया था। इसको लेकर मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह प्रदेश भर में बैठकें कर रहे हैं।