मंथन न्यूज़ भोपाल -जो संत धर्म नीति से राजनीति में प्रवेश करता है, वह विश्व कल्याण करने का काम करता है। लेकिन जो संत धर्म की बजाय कूटनीति से राजनीति में प्रवेश पाता है। वह केवल जगत का नाश ही कर सकता है। यह विचार महंत रामगिरि महाराज (डंडा वाले महाराज) ने व्यक्त किए।
यह बैठक मठ-मंदिरों से कलेक्टर प्रबंधन खत्म कर उसकी जिम्मेदारी संत पुजारियों को सौंपने की मांग के लिए आयोजित की गई थी। लेकिन इस संत समागम में मुद्दा गहराया रहा 5 संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने का। बैठक में संतों ने इस मुद्दे को लेकर अपने कड़े तेवर दिखाए और शिवराज सरकार के प्रति अपनी तल्ख प्रतिक्रियाएं दीं। ज्यादातर संतों का यही मत था कि, सरकार ने जो फैसला लिया है। वह पूरी तरह से गलत है।
गुरुवार को गुरुबख्श की तलैया स्थित श्रीराम मंदिर में विभिन्न समस्याओं को लेकर संत-पुजारियों व धार्मिक संस्थाओं की बैठक आयोजित की गई।
यह बैठक मठ-मंदिरों से कलेक्टर प्रबंधन खत्म कर उसकी जिम्मेदारी संत पुजारियों को सौंपने की मांग के लिए आयोजित की गई थी। लेकिन इस संत समागम में मुद्दा गहराया रहा 5 संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने का। बैठक में संतों ने इस मुद्दे को लेकर अपने कड़े तेवर दिखाए और शिवराज सरकार के प्रति अपनी तल्ख प्रतिक्रियाएं दीं। ज्यादातर संतों का यही मत था कि, सरकार ने जो फैसला लिया है। वह पूरी तरह से गलत है।
आदर्श है दिग्गी की नर्मदा यात्रा, शिवराज की एकात्म यात्रा में भी हुआ भ्रष्टाचार
बैठक में महंत रामगिरि महाराज (डंडा वाले महाराज) ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नर्मदा यात्रा एवं एकात्म यात्रा को भी कटघरे में खड़ा कर दिया। महंत रामगिरी ने कहा कि शिवराज की यात्रा आडंबरों से भरी हुई थी, जिसमें जनता के पैसे की बर्बादी की गई। धर्म यात्रा का बहुत ज्यादा प्रचार प्रसार किया गया था। एकात्म यात्रा में भारी घोटाला हुआ है जिसकी जानकारी आरटीआई के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। इसके इतर वर्तमान में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की नर्मदा यात्रा को उन्होंने आदर्श बताया।
सीएम हाउस की ओर किया कूच, पुलिस ने रोका
श्री राम मंदिर में सुबह करीब 10:30 बजे संत-पुजारियों की बैठक शुरू हुई, जो दोपहर करीब 2:30 बजे तक जारी रही। बैठक के बाद अपनी मांगों को लेकर सैंकड़ों संत पुजारियों ने सीएम हाउस का घेराव करने के लिए कूच किया।
सभी संत भजन कीर्तन करते हुए व नारे लगाते हुए मुख्यमंत्री निवास की ओर तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें भारत टाकिज पर ही रोक दिया। जिसके बाद संत पुजारी कुछ देर तक वहां मौजूद रहे और नारेबाजी करते रहे। अंत में संतों ने एडीएम जीपी माली को मुख्यमंत्री ने नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांगों को जल्द पूरा न करने पर आंदोलन की चेतावनी संतों द्वारा दी गई है।
विवेकपूर्ण नहीं शिवराज का फैसला, परिणाम अच्छा नहीं होगा
जिन संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है, उन्हें न धर्म और न ही संतों की परवाह है। अगर परवाह होती तो वे संतों के कंधे से कंधा मिलाने बैठक में मौजूद होते। शिवराज के साथ ही राज्य मंत्री बने संतों का फैसला बिल्कुल भी विवेकपूर्ण नहीं है। भविष्य में इसका परिणाम अच्छा नहीं होगा।
-संत धनीराम दास, अखिल भारतीय संत संयोजक (छतरपुर)
साथी संतों को भूलने वाला समाज का क्या भला करेगा
जो संत अपने साथी संतों को ही भूलकर संत समागम में नहीं आया। जो संत मठ-मंदिरों व संत-पुजारियों की समस्याओं को ही भूल गया। उसे समाज के अन्य सभी वर्गों की की समस्याएं क्या याद रहेंगी, वह क्या समाज का भला करेगा।
भागीरथ दास बैरागी, (शाजापुर)
सीएम ने पांच रत्न बनाए हैं, हम नाखुश हैं
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संतों को राज्य मंत्री बनाकर अपने पांच रत्न बनाए हैं। इससे हम खुश नहीं हैं। नर्मदा यात्रा में हुए भारी खोटाले को दबाने के लिए ऐसा किया गया है।
चंद्रमादास त्यागी, महंत, गुफा मंदिर

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