पंचायत सचिवों को लिपिकों की तरह वेतनमान देने से बढ़ी थी नाराजगी
प्रदेश में कई विभागों और परियोजनाओं में संविदा पदों पर कर्मचारी 10-15 साल से कार्यरत हैं। पिछले कई सालों से ये नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। पिछले सात साल में इनके अलग-अलग संगठन 70 से ज्यादा छोटे-बड़े आंदोलन भी कर चुके हैं। इस बीच सरकार ने अध्यापकों के स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन की घोषणा कर दी। पंचायत सचिवों को लिपिकों की तरह वेतनमान दे दिया। इसके बाद संविदा कर्मचारियों की नाराजगी और बढ़ गई है।
सीएम से मिला महासंघ
राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के चेयरमैन रमेशचंद्र शर्मा ने पिछले पांच महीने में इन संगठनों के ज्ञापन मिलने के बाद सीएम से तीन दौर की बातचीत भी की। नियमित करने की मांग को लेकर मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ, संविदा संयुक्त मंच का आंदोलन भी जारी है। सोमवार को महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष रमेश राठौर ने सीएम से इस बारे में बातचीत भी की।
ये हैं अन्य विकल्प
- ज्यादातर विभागों में रिटायरमेंट के बाद पद खाली होंगे। इन पर विभागीय परीक्षा लेकर नियुक्ति।
- पंजाब, हरियाणा, दिल्ली राज्य सरकारों की तरह मप्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के समान काम समान वेतन का आदेश मानकर वेतन- भत्ते बढ़ा सकती है।
- दैवेभो को तीन श्रेणी में बांटकर स्थाई कर्मी बनाया था। इन्हें श्रेणीवार स्थाई कर्मी का दर्जा दिया जा सकता है।
- दैवेभो को तीन श्रेणी में बांटकर स्थाई कर्मी बनाया था। इन्हें श्रेणीवार स्थाई कर्मी का दर्जा दिया जा सकता है।
- एएनएम की तरह विभागीय परीक्षा लेकर नियमित कर्मचारियों की तरह लाभ दिया जा सकता है।
किस विभाग में कार्यरत हैं कितने संविदा कर्मचारी
पंचायत एवं ग्रामीण विकास7155स्कूल शिक्षा2918राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन18006आयुष- पैरामेडिकल1511खेल एवं युवा कल्याण928जन अभियान परिषद2000महिला एवं बाल विकास1215पीएचई1998ऊर्जा2787
यह आ सकती है अड़चन
- नए सेटअप के लिए केंद्र से मंजूरी लेना पड़ सकता है।
- केंद्र की कई परियोजनाओं में संविदा अधिकारी व कर्मचारी जिन पदों पर कार्यरत हैं, वे पद राज्य के सेटअप में नहीं हैं। इन पदों पर संविलियन होने में तकनीकी दिक्कत आएगी।
कैडर मैनेजमेंट पर फोकस करना चाहिए
रिटायर्ड चीफ सेक्रेटरी केएस शर्मा के मुताबिक, सरकार को इन्हें रेगुलर करना ही चाहिए। वजह यह है कि एक ही तरह के पद पर दो श्रेणी के संविदा और नियमित कर्मचारी की नीति उचित नहीं है। संविदा पद तो तय अवधि की परियोजनाओं के लिए ही बेहतर होते हैं। राज्य सरकार को कैडर मैनेजमेंट पर ज्यादा फोकस करना चाहिए।
रिटायर्ड चीफ सेक्रेटरी केएस शर्मा के मुताबिक, सरकार को इन्हें रेगुलर करना ही चाहिए। वजह यह है कि एक ही तरह के पद पर दो श्रेणी के संविदा और नियमित कर्मचारी की नीति उचित नहीं है। संविदा पद तो तय अवधि की परियोजनाओं के लिए ही बेहतर होते हैं। राज्य सरकार को कैडर मैनेजमेंट पर ज्यादा फोकस करना चाहिए।

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