पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल -विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही विभिन्न् जाति आधारित सामाजिक संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। सरकार के खिलाफ मुखर हो रहे ज्यादातर संगठनों की मांग सिर्फ 'आरक्षण' है। ये संगठन साफतौर पर सरकार को धमका रहे हैं कि उन्हें आरक्षण नहीं तो वोट नहीं। हालांकि मध्यप्रदेश की शांतिप्रिय राजनीतिक फिजा में अब तक न तो कभी जातिवादी सियासत ने पैर पसारे और न ही कभी ऐसी पार्टियां यहां पनप पाईं। बहुजन समाज पार्टी, यादवों की समाजवादी पार्टी और गोंडवाना पार्टी के प्रयोग भी प्रदेश में सफल नहीं रहे हैं।
गुजरात की तिकड़ी सक्रिय
गुजरात के आरक्षण समर्थक नेता हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी प्रदेश की सियासत को जातिवाद से ही गरम करने में लगे हैं। मप्र में पिछड़ा वर्ग की आबादी 54 फीसदी से ज्यादा है। 2003 से लेकर अब तक ये वर्ग भाजपा के साथ रहा है। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ओबीसी वर्ग से आते हैं। पूर्व सीएम उमा भारती लोधी वर्ग से और बाबूलाल गौर यादव वर्ग से हैं। कुशवाह और पाटीदार समाज भी 50 विधानसभा क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं। ओबीसी के प्रभाव को देखकर ही मुख्यमंत्री ने बालकृष्ण पाटीदार, जालमसिंह पटेल और नारायण सिंह कुशवाह को मंत्री बनाया। अब तक ओबीसी के 65 फीसदी से ज्यादा वोट भाजपा को मिल रहे हैं। गुजरात के नेताओं की तिकड़ी भाजपा के इस परम्परागत वोट बैंक को ही हिलाने में लगी है।
मप्र में सफल नहीं रही जातिवादी राजनीति
बहुजन समाज पार्टी हो या समाजवादी पार्टी अथवा गोंडवाना पार्टी, इनकी जातिवादी राजनीति मप्र में कभी सफल नहीं रही है। भाजपा-कांग्रेस के अलावा न तो कोई तीसरा दल यहां खड़ा हो पाया और न ही ऐसे दलों को कभी लोगों ने बढ़ावा दिया पर आने वाले चुनाव की जिस तरह बिसात बिछाई जा रही है, उससे स्पष्ट है कि जातिवाद की सियासत नाक में दम कर देगी।
सपाक्स-अजाक्स की भी धमकी
प्रदेश के कर्मचारी इन दिनों सपाक्स और अजाक्स के बीच बंट गए हैं। सपाक्स यानी सामान्य एवं पिछड़ा अल्पसंख्यक वर्ग कर्मचारी संघ और अजाक्स संगठन में एसटी-एससी कर्मचारी शामिल हैं। सपाक्स चाहता है कि पदोन्न्ति में आरक्षण को खत्म किया जाए। वहीं अजाक्स सरकार पर दबाव बना रहा है कि चुनाव से पहले पदोन्न्ति के नए नियम बनाकर उन्हें आरक्षण का लाभ दिया जाए। दोनों ही संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि उनकी मांग को नजरअंदाज किया तो वोट नहीं मिलेंगे।
क्या कहते हैं नेताजी
आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे
मीना समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष किरोड़ीलाल मीणा कहते हैं कि हमें मप्र में अनुसूचित जनजाति में शामिल करते हुए आरक्षण का लाभ दिया जाए। समाज इसके लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेगा।
तो भाजपा का विरोध करेंगे
मप्र युवा सेन समाज संगठन के प्रदेशाध्यक्ष प्रवीण सेन 'परमात्मा" कहते हैं कि 2007 में मप्र विधानसभा में सरकार ने सेन समाज को अनुसूचित जाति का दर्जा देने का संकल्प पारित किया था। अब यदि इसका लाभ नहीं दिया तो हम भाजपा का विरोध करेंगे।
किसकी-क्या मांग
- सेन समाज - अनुसूचित जाति में शामिल करते हुए आरक्षण का लाभ दिया जाए।
- मीना समाज - मप्र में अनुसूचित जनजाति का दर्जा चाहिए।
- वाल्मिकी समाज - अनुसूचित जाति के तहत अलग से 3 फीसदी आरक्षण दिया जाए।
- पाटीदार समाज - ओबीसी का सही लाभ मिले। प्रदेश में पिछड़ा वर्ग को संवैधानिक रूप से 27 फीसदी आरक्षण का लाभ दिलाने की मांग।

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