राज्‍यपाल ने पूछा : परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने से क्यों पिछड़ रहे लड़के?

aanandi ben 23 02 2018पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल -आजकल परीक्षाओं में अच्छा परिणाम सिर्फ लड़कियां ही दे रही हैं। लड़के काफी पीछे हो गए हैं। चाहे बोर्ड परीक्षा हो या फिर प्रतियोगी परीक्षा टॉप टेन में से अधिकतम 8 लड़कियां ही होती हैं। जबकि, लड़कियों की संख्या कम हो रही है। आप तो रिसर्च करवाते हैं न इस संबंध में भी रिसर्च कराइए कि लड़के इतने क्यों पिछड़ रहे हैं या परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन क्यों नहीं कर पा रहे हैं।
यह बात राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कही। वे शुक्रवार को राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में कुलाधिपति छात्रवृत्ति वितरण समारोह के दौरान बोल रही थीं। राज्यपाल ने इंजीनियरिंग के छात्रों से कहा कि हर क्षेत्र, गली और मोहल्ले में टेक्नॉलाजी दिखाई देती है। बस हमें उस नजरिए से देखना होगा।
उन्होंने कहा कि जब माता गर्भवती होती है तो उसके खान-पान का पूरा ध्यान रखा जाता है कि क्या खाना है क्या नहीं खाना है। क्या खाने से बच्चे पर असर पड़ेगा और क्या खाने से बच्चा स्वास्थ्य पैदा होगा। यह भी फूड टेक्नॉलाजी का उदाहरण है।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने 605 विद्यार्थियों में से 30 को मंच पर बुलाकर चांसलर स्कालरशिप दी। स्कालरशिप लेने में 80 फीसदी से ज्यादा छात्राएं शामिल थीं। बता दें कि दो सत्रों में 2015-16 और 2016-17 में अपनी ब्रांच में प्रथम स्थान हासिल करने वाले विद्यार्थियों को कुल एक करोड़ 21 लाख रुपए स्कालरशिप में दिए गए। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव संजय बंधोपाध्याय, कुलपति सुनील गुप्ता, रजिस्ट्रार सुरेश कुमार जैन भी मौजूद थे।
गोल रोटी बनाना भी है टेक्नॉलाजी
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विद्यार्थियों को बताया कि गोल रोटियां बनना भी टेक्नॉलाजी का हिस्सा है, जो सिर्फ लड़कियों को ही आती है। उन्होंने कहा कि जो स्कालरशिप उन्हें दी जा रही है, उसका विद्यार्थी अपने पाठ्य कौशल को और अधिक निखारने में उपयोग करें। दूसरे विद्यार्थियों की मदद करें और उनके प्रेरणा स्त्रोत बनें।
ऐसा ट्रेनिंग सेंटर खुलें जहां छात्र बड़े प्रोजेक्ट डिजाइन कर सकें
राज्यपाल ने कहा कि जब वे गुजरात में तकनीकी शिक्षा मंत्री थीं, उस समय एक व्यक्ति उनके पास आया और करीब आधे घंटे टेक्नॉलाजी और प्रोजेक्ट्स पर चर्चा की। इस दौरान उन्हें पता चला कि वर्तमान में जो भी विवि चल रहे हैं, वे केवल 15 करोड़ तक के प्रोजेक्ट्स की ही डिजाइन बनना विद्यार्थियों को सीखाते हैं। इसके ऊपर के नहीं। इसके लिए विद्यार्थियों को ट्रेनिंग पर भेज दिया जाता है। इसलिए अलग से ऐसे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोले जाने चाहिए जो बड़े प्रोजेक्ट्स पर विद्यार्थियों को काम करना सीखाएं, जो कि उन्होंने शिक्षा मंत्री रहते गुजरात में खोला है।
रामायण और महाभारत का उदारण देकर भी समझाई टेक्नॉलाजी
राज्यपाल ने कहा कि माइक्रो सर्जरी जो वर्तमान में चल रही है, वह हमारे देश में वर्षों पहले ही शुरू हो गई थी। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है भगवान गणेश। उन्होंने विद्यार्थियों से पूछा कि रामायण पढ़ी है तो अधिकांश बच्चों ने इसका न में जवाब दिया तो कुछ ने कहा थोड़ी-थोड़ी पढ़ी है।
इस पर उन्होंने बताया कि रामायण में सीता हरण के समय जो विमान उपयोग किया गया था वह आज का हेलीकॉप्टर है, लेकिन वर्तमान में इसकी खोज का श्रेय राइट बंधु को जाता है। इसी तरह महाभारत युद्ध के दौरान लाइव घटनाक्रम बताने वाले संजय की दृष्टि का उदाहरण वर्तमान के टीवी को बताया।
उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं में टेक्नॉलाजी बहुत पहले ही शुरू हो गई थी। उन्होंने आर्यभट्ट से लेकर पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम तक सभी महान वैज्ञानिकों के नाम गिनाए और कहा कि इसी तरह हमें भारत को महान बनाने के लिए इन सब से प्रेरणा लेकर उपकरण बनाने होंगे।