पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली - राज्य सभाकी 58 सीटों पर अगले महीने होने वाले चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल विस्तार की तरह ही नए उम्मीदवार उतारकर चौंका सकते हैं। समझा जाता है कि इस बार भाजपा बेहतर वक्ता और सियासी समीकरण में फिट बैठने वालों को ही मैदान में उतारेगी।
इस चुनाव के जरिये विस्तार की संभावना वाले दक्षिण व पूर्वोत्तर के राज्यों, पश्चिम बंगाल और ओडिशा को साधने की योजना है। हालांकि पार्टी स्तर पर इस चुनाव को लेकर पहली चर्चा 3 मार्च को पूर्वोत्तर के विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद ही शुरू होगी।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक सरकार में पीएम की पहली पसंद बेहतर प्रशासक और बेहतर प्रदर्शन करने वाले रहे हैं। यही कारण है कि पिछले मंत्रिमंडल विस्तार में पीएम ने दो चर्चित नौकरशाहों हरदीप पुरी और अल्फोंस कन्ननथनम को टीम में जगह देकर सबको चौंकाया था। इसके अलावा निर्मला सीतारमण और प्रकाश जावड़ेकर को तरक्की दी।
आगामी लोकसभा चुनाव से पहले हो रहे राज्यसभा चुनाव में सियासी समीकरण साधना पार्टी का मुख्य मकसद होगा। अगर पार्टी त्रिपुरा में बेहतर प्रदर्शन करती है तो पूर्वोत्तर के अलावा पश्चिम बंगाल और ओडिशा के उम्मीदवारों को खास तवज्जो मिलेगी। पार्टी नेताओं का मानना है कि त्रिपुरा के नतीजे का असर पूर्वोत्तर, पश्चिम बंगाल और ओडिशा पर भी पड़ेगा। इसी प्रकार तीन मनोनीत सदस्यों का कोटा केरल, तमिलनाडु जैसे दक्षिण राज्यों से भरा जाएगा। मंत्रियों के अलावा किसी की उम्मीदवारी तय नहीं
चुनाव में अरुण जेटली, जेपी नड्डा, धर्मेंद्र प्रधान, प्रकाश जावड़ेकर सहित सात मंत्रियों के अलावा किसी की उम्मीदवारी तय नहीं है। गौरतलब है कि भाजपा के इन मंत्रियों सहित 17 सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। जबकि पार्टी को इन सीटों के अलावा कम से कम 15 अतिरिक्त सीटें हासिल होंगी। उम्मीदवारी पर मंथन भी 3 मार्च की मतगणना के बाद ही शुरू होगा।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक सरकार में पीएम की पहली पसंद बेहतर प्रशासक और बेहतर प्रदर्शन करने वाले रहे हैं। यही कारण है कि पिछले मंत्रिमंडल विस्तार में पीएम ने दो चर्चित नौकरशाहों हरदीप पुरी और अल्फोंस कन्ननथनम को टीम में जगह देकर सबको चौंकाया था। इसके अलावा निर्मला सीतारमण और प्रकाश जावड़ेकर को तरक्की दी।
आगामी लोकसभा चुनाव से पहले हो रहे राज्यसभा चुनाव में सियासी समीकरण साधना पार्टी का मुख्य मकसद होगा। अगर पार्टी त्रिपुरा में बेहतर प्रदर्शन करती है तो पूर्वोत्तर के अलावा पश्चिम बंगाल और ओडिशा के उम्मीदवारों को खास तवज्जो मिलेगी। पार्टी नेताओं का मानना है कि त्रिपुरा के नतीजे का असर पूर्वोत्तर, पश्चिम बंगाल और ओडिशा पर भी पड़ेगा। इसी प्रकार तीन मनोनीत सदस्यों का कोटा केरल, तमिलनाडु जैसे दक्षिण राज्यों से भरा जाएगा। मंत्रियों के अलावा किसी की उम्मीदवारी तय नहीं
चुनाव में अरुण जेटली, जेपी नड्डा, धर्मेंद्र प्रधान, प्रकाश जावड़ेकर सहित सात मंत्रियों के अलावा किसी की उम्मीदवारी तय नहीं है। गौरतलब है कि भाजपा के इन मंत्रियों सहित 17 सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। जबकि पार्टी को इन सीटों के अलावा कम से कम 15 अतिरिक्त सीटें हासिल होंगी। उम्मीदवारी पर मंथन भी 3 मार्च की मतगणना के बाद ही शुरू होगा।

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