दीपाली को इंस्ट्राग्राम पर बेटू सोनम के नाम से फेक आईडी बना कर ब्लैक मेल करने वाले आरोपी अनस अंसारी पुत्र मोहम्ममद हसन अंसारी निवासी भगत सिंह वार्ड कोंच जिला जालौन उप्र से गिरफ्तार किया है। आरोपी यूपी के जालौन का रहने वाला है। दीपाली से उसकी दोस्ती थी। उसने दीपाली के कुछ आपत्तिजनक फोटो ले रखे थे। इस कारण वह दीपाली काे ब्लैक मेल कर रहा था। आरोपी ने इंस्ट्राग्राम एवं फेसबुक पर फेक आईडी बना रखी थी।
शनिवार को मामले की तहकीकत करने आए सागर रेंज के आईजी ने इनाम बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दिया। इसके एक दिन पहले एसपी ने 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। सूत्रों का कहना है कि दीपाली हत्याकांड का कनेक्शन यूपी के जालौन जिले से हो सकता है।
आईजी से लिपटकर रोने लगे दीपाली के पिता: आठवें दिन सागर रेंज के आईजी सतीश कुमार सक्सेना दीपाली के घर पहुंचे। उन्हें देखकर दीपाली के पिता लिपटकर रोने लगे। आईजी ने परिजनों को ढांढस बंधाया। आईजी ने दुखी परिवार को सांत्वना देकर हत्याकांड का अतिशीघ्र खुलासा कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि हत्याकांड के शीघ्र खुलासे के लिए काबिल थानेदारों को जांच में शामिल किया गया है। उम्मीद है कि एक दो दिन में घटना का खुलासा हो जाएगा। उन्होंने लोगों से बात करने के बाद जनता से अपील की है कि दीपाली को 15 फरवरी को महा विद्यालय परिसर से निवाड़ी तिगैला तक आते जाते हुए देखा हो या अन्य कोई तथ्य उसके बारे में ज्ञात हों, जिससे पुलिस को जांच में सहयोग मिल सके तो वह गोपनीय तरीके से पुलिस को जानकारी दे सकता है। यह जानकारी मेरे मोबाइल नंबर 9425014425 पर या फिर पुलिस अधीक्षकए अपने थाना प्रभारी को दे सकता है। उसका नाम गुप्त रखा जायेगा। उन्होंने बताया कि आरोपियों के बारे में जानकारी देने वालों को अब दस के स्थान पर पच्चीस हजार रूपया ईनाम दिया जायेगा।घटना की जांच अभी एडीसनल एसपी राकेश खाका के नेतृत्व में चल रही है। जिसमें जिले के जतारा थाना प्रभारी राजेश बंजारे, बल्देवगढ़ थाना प्रभारी कैलाश बाबू आर्या को शामिल किया गया है। वहीं छतरपुर जिले से निवाड़ी के सफल पूर्व थाना प्रभारी विनायक शुक्ला को भी जांच में शामिल किया गया। आईजी ने बताया कि छतरपुर रेंज के उप महानिरीक्षक अनिल महेश्वरी सोमवार को कार्यभार संभालने के बाद जांच की कमान सौंपी जाएगी। पिता अखिलेश ने आईजी से उक्त मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।
बरुआ सागर के पास मिला शव यूपी पुलिस को बरुआसागर के पास बेतवा में एक छात्रा का शव पड़ा मिला। जांच पड़ताल में पता चला कि छात्रा कोई और नहीं निवाड़ी की दीपाली दुबे थी। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि दीपाली किसके साथ घूमने निकली थी। यहा शुरु हुआ सवालों का सिलसिला। िजन पर पुलिस की जांच चल रही है। मसलन दीपाली के साथ कौन-कौन था। वह अपनी मर्जी से गई या उसे जबरन ले जाया गया।
घटना के दिन पापा को पराठे
खिलाकर कॉलेज निकली पिता ने भास्कर से बातचीत में बताया कि दीपाली 15 फरवरी यानी घटना वाले दिन सुबह मुझे पराठे बनाकर खिलाए। बोली पापा आप पराठे खा लो। इसके बाद मैं कॉलेज चली जाऊंगी। पराठे खाकर मैं निकल गया। दीपाली भी कॉलेज चली गई। वह दोपहर 2 बजे तक कॉलेज में रही। इसके बाद गायब हो गई। देर शाम तक जब घर वापस नहीं लौटी तो उसकी खोजबीन शुरु की।
दिल्ली में निर्भया की मां ने भी की घटना की निंदा, 8 मिनट का वीडियो जारी किया दिल्ली में हुए निर्भया कांड को लोग अभी तक नहीं भूले हैं। निर्भया की मां ने भी दीपाली दुबे हत्याकांड को शर्मनाक बताया है। उन्होंने 8 मिनट का वीडियाे जारी किया है, जिसमें दीपाली की मौत को दुखद और समाज को शर्मसार करने वाली घटना कहा है। उन्होंने कहा कि दीपाली के परिजनों को जल्द न्याय मिलना चाहिए। मैं इस दुख की घड़ी में परिजनों के साथ हूं।
अपराधियों में पुलिस के खौफ और आम आदमी में पुलिस के भरोसे की हत्या है यह टीकमगढ़ जिले की फिजा को इन दिनों हुआ क्या है, समझना मुश्किल है। एक के बाद एक और एक से बढ़कर एक अपराध हो रहे हैं यहां। कॉलेज से लौट रही एक होनहार छात्रा के दिन दहाड़े गायब होने और फिर उसकी हत्या से कानून व्यवस्था पर जो सवाल उठ रहे थे, उन्हें दुष्कर्म, धर्म परिवर्तन की धमकी के चलते खुदकुशी और फिर खुद पुलिसकर्मी की हत्या की अलग-अलग घटनाओं ने चीत्कार में बदल दिया है।
निवाड़ी में छात्रा दीपाली की हत्या की घटना को आठ दिन बीत चुके। घटना से जुड़े कई सवाल अभी तक जवाब की राह तक रहे हैं। वह किसके साथ गई थी? क्यों गई थी? या कोई जबरन ले गया था? लास्ट लोकेशन क्या थी? हत्या कहां हुई? शव निवाड़ी से 11 किमी दूर बेतवा नदी (यूपी) में कैसे पहुंचा? हत्यारा कौन? यानी पुलिस के पास अभी तक अपराध से जुड़ा कोई क्लू ही नहीं है। निवाड़ी जैसे छोटे कस्बे में इतनी बड़ी वारदात हो जाती है और पुलिस आठ दिन में ऐसा शख्स भी नहीं ढूंढ पा रही, जिसने दीपाली को आखिरी बार देखा हो। ये कैसा नेटवर्क है? कैसी मुखबिरी? दफ्तरों से थानेदारी चलाते-चलाते क्या जमीनी पकड़ इतनी कमजोर हो चली है? संदेही भी पकड़े तो ऐसे कि जिनसे कोई लीड पुलिस को नहीं मिली और उन्हें छोड़ना पड़ा। आठ दिन बाद बड़ी मुश्किल से एक ऐसा बंदा हाथ आया है जो फेक आईडी बनाकर दीपाली से बात करता था। यह भी अभी पुलिस का दावा है।
क्या अपराधी पुलिस पर इतने भारी हो गए हैं? इतने चालाक कि कोई सुराख ही नहीं छोड़ गए? इतने तकनीक-समृद्ध कि साइबर क्राइम की टीम भी उनके जाल को नहीं भेद पा रही है? अगर ऐसा है तो पुलिस महकमे को हर स्तर पर अपने अपडेशन के लिए सोचना ही चाहिए। क्योंकि अपराधी मैदान में हैं (दफ्तर उनका होता नहीं और सलाखों में पुलिस ला नहीं पा रही तो निश्चित ही मैदान में हैं ), शातिर हैं , बेखौफ हैं और लगातार अपडेट भी हो रहे हैं। इसका जीता-जागता उदाहरण देखिए कि संभाग के सबसे बड़े पुलिस अफसर (आईजी) के टीकमगढ़ में होने के बावजूद शनिवार को महज 60 किलोमीटर दूर पृथ्वीपुर में लूट की जांच करने गए सिपाही को गोली मारकर उसकी जान ले ली गई। जब सिपाही ही सुरक्षित नहीं है तो आपकी-हमारी क्या बिसात? दीपाली और सिपाही की हत्या दरअसल अपराधियों में पुलिस के खौफ की हत्या है । साथ ही आम आदमी में पुलिस के भरोसे का खून भी।

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