मोदी मंत्र : जानिए, बच्चों ने किस तरह के पूछे सवाल, पीएम ने क्या दिए जवाब

PM Narendra Modi पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय-समय पर बच्चों को पढ़ाई और परीक्षा के दौरान तवावमुक्त रहने की बात कहते रहे हैं. बच्चे इस तनाव से कैसे निपटें इसके लिए प्रधानमंत्री ने बीते दिनों 'एग्जाम वॉरियर्स' नाम से एक किताब जारी की है. मोदी ने अपनी इस किताब में छात्रों को तनावमुक्त परीक्षा के लिए 25 मंत्र दिए हैं. इसके साथ ही बुधवार को उन्होंने राजधानी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देशभर के लाखों-करोड़ों छात्रों के परीक्षा से जुड़े कुछ सवालों के जवाब दिए।
ये हैं वो सवाल जिनके पीएम ने दिए जवाब
समीक्षा पंत, जवाहर नवोदय विद्यालय, दिल्ली 
सवाल : पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देने के बावजूद मन में डर बना रहता है, इसका सामना कैसे करें? 
जवाब : परीक्षा के दौरान तनाव होना स्वाभाविक है, लेकिन इसे अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। पूर्ण आत्मविश्वास के साथ जब शांत मन से ध्यान केंद्रित कर एक बार सवाल को ढंग से पढ़ा जाए तो सारा उत्तर खुद ब खुद हमारे दिमाग में आ जाता है। क्षमता और संसाधनों से ज्यादा आत्मविश्वास जरूरी होता है। आत्मविश्वास किसी का भाषण सुनने से नहीं आता बल्कि इसे हमें खुद अपने अंदर पैदा करना होता है। अगर आत्मविश्वास नहीं तो 33 करोड़ देवी-देवता भी कुछ नहीं कर सकते।
1. कनिष्का वत्स, क्लास 10 डीएवी स्कूल, दादरी 
2. प्रणय व्यास, आईआईटी बीएचयू
सवाल : अगर पढ़ाई से ध्यान भटक रहा है तो पढ़ाई में मन लगाने के लिए हमें क्या करना चाहिए?
जवाब : हर कोई ऐसे काम करता है जिसमें ध्यान जरूरी होता है। उस बात पर ध्यान देना चाहिए कि हमें अपना पसंदीदा काम करने के वक्त क्या महसूस होता है, उसी बात को सोचकर हमें पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि जिन कामों में बुद्धि के साथ मन भी लग जाता है वो सबसे अच्छे ढंग से होता है। जो बीत गया उसकी चिंता छोड़ आगे की वर्तमान की तरफ ध्यान दें। ध्यान केंद्रित करने के लिए पानी का स्वाद लेना चाहिए।
1. नेहा शर्मा, क्लास 9 कालीकट्ट   
2. अरुणा श्रीवास्तव, एनसीआर
सवाल : काम्पिटीशन को देखते हुए हमारे माता-पिता जब अन्य बच्चों से हमारी तुलना करते हैं तो मन निराश हो जाता है, इस स्थिति का सामना कैसे किया जाए?
जवाब : हमें होड़ से दूर रहने के लिए खुद के साथ स्पर्धा करनी चाहिए. हमें अपने दोस्तों के साथ प्रतियोगिता नहीं करनी चाहिए बल्कि उनसे सीखना चाहिए। जब जो करें उसे मन लगाकर करें। हम कभी किसी खिलाड़ी की डिग्री नहीं पूछते। इसके बावजूद सब उसके खेल का आनंद लेते है। इसलिए प्रतिस्पर्धा के बजाय हम अनुस्पर्धा करें। 
1. दीपशिखा, केद्रीय विद्यालय, द्वारका
2. लीला बनो, बीए, लेह
सवाल : मां-बाप परीक्षा में अच्छे नंबर लाने का प्रेशर डालते हैं, वो कभी संतुष्ट नहीं होते, क्या ये सही है?
जवाब : हमें अपने अपने माता-पिता की निष्ठा पर शक नहीं करना चाहिए। माता-पिता बच्चों के लिए कई तरह के त्याग करते हैं। बच्चों को सिर्फ मां-बाप को दिखाने के लिए पढ़ाई नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही सभी माता-पिता को अपने बच्चों की क्षमता को पहचानना चाहिए उन पर अपनी सभी इच्छाएं थोपनी नहीं चाहिए। सिर्फ अंक ही जिंदगी नहीं होती। सब सोचते हैं कि पढ़ाई सिर्फ कमाने का जरिया है। मेरा मानना है कि पढ़ाई कमाई के बजाय कामयाबी का जरिया होती है। दुनिया के हर बच्चे के अंर अलग विशेषता होती है, माता-पिता को उसे देखना और पहचानना चाहिए।
1. अक्षी गुप्ता
2. सलोनी, क्लास 12
सवाल: पढ़ाई पर फोकस करने के लिए हमें क्या करना चाहिए, और परीक्षा के समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल कैसे कम करें?
जवाब: हमें फोकस करने के लिए डिफोकस करना सीखना चाहिए। जैसे किसी बर्तन में दोबारा पानी भरने के लिए पहने उसे खाली करना होता है। वैसे ही मन में कुछ भरने के लिए पहले मन से बहुत कुछ निकालना होता है। खुले मन के साथ जो भी अच्छा लगता है वो करना चाहिए। डिफोकस करने के लिए बचपन की आदतों का सहारा लेना चाहिए। तनाव को दूर करने के लिए कुछ समय प्रकृति के करीब जाना चाहिए।
दीप्शी ग्रोवर, छात्रा, दयाल सिंह कॉलेज
सवाल : परीक्षा और पढ़ाई में योग कैसे हमारी मदद करता है। योग से कैसे ध्यान केंद्रित कर सकते हैं? 
जवाब : योग निश्चित ही हमारे लिए फायदेमंद होता है। इसलिए जो भी आसन हमें अच्छा लगता है उसी के साथ योग की शुरुआत करनी चाहिए। ताड़ासन योग से शरीर और मन जुड़ता है। नींद भी हमारे लिए आवश्यक होती है, लेकिन नींद संयमित होनी चाहिए। इसके लिए हमें योग निद्रा सीखनी चाहिए। वैज्ञानिक मानते हैं कि आईक्यू 5 साल के पहले पनपना शुरू होता है। जिस तरह 4-5 महीने का बच्चा मां द्वारा बजाए गए घुंघरू पर ध्यान केंद्रित करता है उसे ही आईक्यू कहते हैं। इमोशन प्रेरणा का सबसे बड़ा श्रोत होते हैं। जितनी संवेदना से जुड़ी चीजों से जुड़ते हैं उनका आईक्यू उतनी ही तेजी के साथ ईक्यू में बदलता है।    
सवाल : परीक्षा के दौरान बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए आप शिक्षकों को क्या सलाह देना चाहेंगे?
जवाब : शिक्षक अपना दायित्व अच्छी तरह से निभा रहे हैं। वो समय-समय पर बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाते रहते हैं। इसके साथ ही मेरा मानना है कि अगर शिक्षक सिर्फ छात्र से नहीं उसके परिवार और आदतों से भी जुड़ें तो परिणाम और बेहतर हो सकते हैं। हमारे समाज में शिक्षकों को पहले परिवार के सदस्यों की तरह माना जाता था, आज हमें इस भावना को फिर से जगाने की आवश्यकता है। 
जय मिस्त्री, छात्र 
सवाल : परीक्षा के समय टाइम मैनेजमेंट कैसे करे?
जवाब : टाइम के मिस मैनेजमेंट की शुरुआत अज्ञानता से होती है। टाइम का सदुपयोग किन-किन चीजों में ये बात हमें पता होनी चाहिए। एक ही टाइम टेबल 365 दिन काम नहीं आता। टाइम मैनेजमेंट सीखने के लिए कम से कम एक बार डायरी लिखने की आदत डालनी चाहिए। 
सवाल : करियर के ऑप्शन बहुत हैं, करियर का कन्यूजन कैसे दूर करें?
जवाब : मन में जरूर तय कर कर लें कि मैं कुछ करना चाहता हूं। कुछ करने का सपना भी देखिए। नया करने का इरादा पैदा करें। आप कुछ करने का सपना देखिये। कुछ बनना तय करने से आपकी स्वतंत्रता छीन जाती है।
गिरीश सिंह, छात्र 11वीं, जवाहर नवोदय 
सवाल : अगले साल हम दोनों की परीक्षा है, मेरी 12वीं बोर्ड की और आपकी लोकसभा चुनाव में, क्या आप भी नर्वस हैं?
जवाब : पीएम मोदी ने छात्र गिरीश से कहा कि ऐसा घुमाकर सवाल पूछने के लिए मैं आपको पत्रकारिता में जाने की सलाह देना चाहूंगा। मेरे बोर्ड के एग्जाम में 125 करोड़ लोगों का साथ है। हर घड़ी मैं किसी न किसी परीक्षा की तैयारी कर रहा होता हूं। मैं राजनीति में हूं, लेकिन मेरे मन में राजनीति नहीं है।