लोकसभा चुनाव 2019 से पहले उत्तर प्रदेश में होगी विपक्ष की अग्निपरीक्षा

Rahul-akhilesh-and-mayawatiपूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ लखनऊ ०९फ़ब 2018 -उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों सपा, बसपा और कांग्रेस की संभावित एकजुटता की परीक्षा आगामी अप्रैल में राज्यसभा की दस सीटों के लिए होने वाले चुनाव में होगी. राज्यसभा में उत्तर प्रदेश से चुने जाने वाले 31 सदस्यों में से 9 सदस्यों का कार्यकाल दो अप्रैल को खत्म हो रहा है, जबकि पिछले साल जुलाई में बसपा प्रमुख मायावती के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर भी अप्रैल में चुनाव संभावित है. जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें सपा के छह राज्यसभा सदस्य नरेश अग्रवाल, जया बच्चन, किरणमय नंदा, दर्शन सिंह यादव, मुनव्वर सलीम और आलोक तिवारी हैं. इसके अलावा बसपा के एम. अली, भाजपा के विनय कटियार और कांग्रेस के प्रमोद तिवारी शामिल हैं.
उप्र विधानसभा में संख्या बल के मुताबिक 312 विधायकों वाली सत्तारूढ़ भाजपा को राज्यसभा की दस में से आठ सीटें मिलना तय है, जबकि 47 विधायकों वाली सपा की झोली में एक सीट जायेगी. शेष बची एक सीट अपने पाले में रखने के लिये विपक्षी दलों सपा, बसपा और कांग्रेस में सरगर्मियां तेज हो गयी है. विपक्ष में यदि संयुक्त उम्मीदवार को लेकर सहमति बनती है तो यह सीट उन्हें मिल सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के एक सदस्य के चुनाव के लिये 36 विधायकों के मत की जरूरत होगी. स्पष्ट है कि दो सीट के लिए 72 मतों की जरूरत को देखते हुए सपा के 47, कांग्रेस के सात और बसपा के 19 विधायकों के कुल 73 मत पर्याप्त साबित होंगे.

सपा, कांग्रेस व बसपा के बीच इस मसले पर शुरुआती बातचीत की पुष्टि करते हुए कांग्रेस के एक नेता ने कहा, ‘‘इस पहल का मकसद आने वाले चुनावों में भाजपा की चुनौती से निपटने के लिये विपक्षी एकजुटता की कवायद को कारगर बनाना है.’’ नेता ने कहा, ‘तीनों दलों के बीच सहमति बनती है तो बसपा प्रमुख मायावती इस सीट के लिए उम्मीदवार हो सकती हैं.’ उत्तर प्रदेश से कांग्रेस के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर एक समाचार वेबसाइट से कहा कि राज्यसभा के चुनावों में तीनों दलों के बीच सहमति बनती है तो इसका असर लोकसभा की खाली हुई सीटों के उपचुनाव पर भी पडे़गा.
राज्य में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के लोकसभा से इस्तीफा देने से खाली हुई गोरखपुर एवं फूलपुर सीट तथा हुकुम सिंह के निधन से खाली हुई कैराना सीट पर उपचुनाव होने हैं.
हालांकि, सपा के नेता मान रहे हैं कि मायावती यदि खुद विपक्षी एकजुटता की पहल में दिलचस्पी नहीं लेंगी तो सहमति बनना मुश्किल होगा। हाल में संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से बुलाई गई विपक्ष के नेताओं की बैठक में भी बसपा शामिल नहीं हुई. सपा एवं कांग्रेस के नेता बसपा के इस रुख से आशंकित भी हैं.