पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल 10feb 2018 -मध्यप्रदेश में भारतीय मानक ब्यूरो का महकमा इसलिए हैरान-परेशान है कि उसका जनता से जुड़ाव नहीं हो पा रहा। बोतलबंद पानी से लेकर दैनंदिनी उपयोग की ढेरों वस्तुओं में घटिया क्वालिटी और फर्जी आईएसआई मार्का जैसे मामले सामने आते हैं पर ब्यूरो को फीडबैक नहीं मिलता। हालत यह है कि सात करोड़ से अधिक आबादी के बावजूद मप्र से सालभर में मात्र 3 शिकायतें ही मिलीं। इनमें दो 'इनपुट" व्यापारिक प्रतिस्पर्धियों के थे।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि उन्हें जनता से फीडबैक नहीं मिलता, इसके लिए ब्यूरो ने अब तक क्या प्रयास किए? इसके जवाब में विभागीय अफसरों का एक ही जवाब है कि हम जनता से अपील करते हैं। जागो ग्राहक जागो वाला विज्ञापन भी कभी-कभार प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिखा दिया जाता है। इसके अलावा मानक ब्यूरो और उपभोक्ताओं के बीच किसी तरह का संवाद नहीं होता। हालत यह है कि मानक ब्यूरो का कार्यालय तक राजधानी में अपनी पहचान का मोहताज है। औद्योगिक प्रतिष्ठान के ऐसे लोग जिनका यहां काम अटकता है वे ही पूछताछ करते हुए कार्यालय तक पहुंचते हैं।
जनजुड़ाव की पहल नहीं
बताया जाता है कि ब्यूरो की ओर से जनजुड़ाव के लिए कोई पहल नहीं की जाती। ब्यूरो किस तरह काम काज करता है इसके बारे में भी लोगों को जानकारी बहुत कम रहती है। नकली सामान अथवा फर्जी आईएसआई मार्का के मामले बाजारों में रहने के बावजूद ब्यूरो तक नहीं पहुंच पाते। इसके अलावा कौन पचड़े में पड़े यह सोचकर भी लोग फीडबैक देने अथवा शिकायत करने से बचते हैं।
हमारा सूचना तंत्र नहीं
ब्यूरो की प्रमुख प्रीति भटनगार ने बताया कि इस साल कुल तीन शिकायतें ही मिलीं। विभाग का ऐसा कोई सूचना तंत्र नहीं है। जिससे मार्केट की खबरें उस तक निरंतर पहुंचती रहें। इस साल जो तीन सूचनाएं मिलीं उन पर छापे की कार्रवाई की गई। इनमें भोपाल में पुराने कबाड़खाने में पानी के कारोबारी का मामला भी था। फर्जी आईएसआई मार्का एवं बिना लाइसेंस के मार्का लगाने के प्रकरण भी दर्ज किए गए।

Post a Comment