पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली -लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने न्यायपालिका को संवैधानिक दायरे में रहकर काम करने की नसीहत दी है। कहा कि न्यायपालिका को ज्यादा सक्रिय देखकर आम लोग यह मानने लगे हैं कि कोर्ट का हस्तक्षेप बढ़ने लगा है। राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के भारत प्रक्षेत्र के छठे सम्मेलन के समापन सत्र के बाद रविवार को स्पीकर ने प्रेस कान्फ्रेंस कर संसद और न्यायपालिका के रिश्ते को बेहद नाजुक बताया और कहा कि विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका -लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को मर्यादा के साथ अपनी हद में रहते हुए एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने न्यायपालिका को न्यायिक समीक्षा का अधिकार इसलिए दिया था कि राज्य के विभिन्न अंग विधायी तंत्र के तहत संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर ही काम कर सकें, लेकिन देखने में आ रहा है कि वह कुछ ज्यादा ही सक्रिय है।
राजनीति को विकास से दूर रखने की हिदायत
स्पीकर ने राजनीति को विकास की राह से दूर रखने की हिदायत दी। कहा कि सांसद-विधायक के रूप में विकास के नए तरीके तलाशने की कोशिश करनी चाहिए। उसे स्थायी बनाकर एक मजबूत समाज का निर्माण करना चाहिए। सिर्फ कानून बनाने से ही विकास संभव नहीं है, बल्कि उसे प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है। श्रेष्ठ संसदीय नियमों व प्रक्रियाओं को इस तरह अपनाए जाने की जरूरत है जिससे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर विकास कार्यों को करने में सुविधा हो।

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