संवैधानिक दायरे में काम करे न्यायपालिका : सुमित्रा महाजन

sumitra mahajan 18 02 2018पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली  -लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने न्यायपालिका को संवैधानिक दायरे में रहकर काम करने की नसीहत दी है। कहा कि न्यायपालिका को ज्यादा सक्रिय देखकर आम लोग यह मानने लगे हैं कि कोर्ट का हस्तक्षेप बढ़ने लगा है। राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के भारत प्रक्षेत्र के छठे सम्मेलन के समापन सत्र के बाद रविवार को स्पीकर ने प्रेस कान्फ्रेंस कर संसद और न्यायपालिका के रिश्ते को बेहद नाजुक बताया और कहा कि विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका -लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को मर्यादा के साथ अपनी हद में रहते हुए एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने न्यायपालिका को न्यायिक समीक्षा का अधिकार इसलिए दिया था कि राज्य के विभिन्न अंग विधायी तंत्र के तहत संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर ही काम कर सकें, लेकिन देखने में आ रहा है कि वह कुछ ज्यादा ही सक्रिय है।
राजनीति को विकास से दूर रखने की हिदायत 
स्पीकर ने राजनीति को विकास की राह से दूर रखने की हिदायत दी। कहा कि सांसद-विधायक के रूप में विकास के नए तरीके तलाशने की कोशिश करनी चाहिए। उसे स्थायी बनाकर एक मजबूत समाज का निर्माण करना चाहिए। सिर्फ कानून बनाने से ही विकास संभव नहीं है, बल्कि उसे प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है। श्रेष्ठ संसदीय नियमों व प्रक्रियाओं को इस तरह अपनाए जाने की जरूरत है जिससे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर विकास कार्यों को करने में सुविधा हो।
10-11 मार्च को विकास पर चर्चा 
सुमित्रा महाजन ने बताया कि लोकसभा द्वारा 10 व 11 मार्च को नई दिल्ली में पहली बार विकास के मुद्दे पर विधायकों का सम्मेलन किया जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से विकास पर चर्चा होगी। इसके लिए सभी विधानसभा अध्यक्षों व राज्यों केमुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर सूचित किया गया है कि वह अपने प्रदेश से विधायकों की भागीदारी सुनिश्चित करें। वर्ष 2016 में संसद ने पहली बार महिला विधायक कान्फ्रेंस का आयोजन किया था।
चर्चा का मुख्य फोकस न्यायपालिका पर 
उत्तराखंड विधानसभा में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में शक्ति परीक्षण के बाद हरीश रावत सरकार की बहाली के करीब दो साल बाद पटना में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के सम्मेलन में देश-दुनिया के संवैधानिक प्रतिनिधियों की चिंता का मुख्य फोकस विधायिका में न्यायपालिका के दखल पर केंद्रित था। दो दिन तक प्रतिनिधियों ने सतत विकास के लक्ष्यों के साथ अपनी चर्चा और चिंता को विधायिका एवं न्यायपालिका : लोकतंत्र के दो महत्वपूर्ण स्तंभ पर टिकाए रखा। बाद में बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी के साथ संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस में महाजन ने इसे स्वीकार भी किया। विभिन्न राज्यों के स्पीकरों ने न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र पर बातें की और मार्गदर्शन मांगा।