गांव, गली के तीन सवाल, योजना, योग्यता और योगदान

गांव, गली के तीन सवाल, योजना, योग्यता और योगदान

शिवपुरी व्ही एस भूल्ले
जैसा कि हम सबको विधित है और नाना-काकी, दादा-दादी से सुना है कि हमेशा से ही हमारे पूर्वजों ने गांव, गली, गरीब, किसान, पीडि़त, वंचितों की स्वाभिमान कौम ने गांव, गली खेतों में रह, अधनंगे शरीर  अपने खून पसीने से बड़ी-बड़ी सल्तनतें, साम्राज्य, सत्तायें, सरकारें खड़ी की है। और यह कार्य बगैर किसी स्वार्थ के हमारे पूर्वज और हम आज तक कर, अपने कत्र्तव्यों और उत्तरदायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा ईमानदारी के साथ करते आ रहे है।
           मगर दुर्भाग्य कि हम और हमारे गांव, गली के गरीब, किसान, पीडि़त, वंचित, खेतों में ठंड-गर्मी, बारिश के बीच दिन रात एक कर आज भी अधनंगे शरीर रह अभाव ग्रस्त और नैसर्गिक सुविधायें जैसे शिक्षा, स्वास्थ, पेयजल, रोजगार के लिये मोहताज बने हुये है आखिर क्यों?
         आखिर क्यों हमारे पापा, दादा, परदादा, पूर्वजों की पुण्याई और उनकी कड़ी मेहनत तथा कुर्बानियां बेकार हो गयी। जो पेयजल हमें व हमारे पशुधन, गऊ माता को प्रकृति-प्रदत्त, नैसर्गिक सुविधाओं के रुप में कुआं, तालाब, पोखर, नदियों में बेरोक टोक नसीब था आज वह विकास की बाढ़ और सेवा वीरों के रहते हमसे दूर 100, 200, 400 फीट जमीन के अन्दर ही नहीं, कहीं तो कहीं तो 7-8 सौ फीट क्यों जा पहुंचा। क्या अपराध था हमारी मेहनत और पुण्याई का।
         देखा जाये तो सेकड़ों हजारों पशुधन, पशु-पक्षी, पेयजल, भोजन के अभाव में दम तोड़ जा जाते  है क्योंकि न तो भीषण गर्मी के दौरान जमीन पर खुला पेयजल बचा, न ही चरनोई के लिये जमीन और जंगल, गांव, गलियों में पलते कुपोषित बच्चे, मातायें पोषण के लिये संघर्षरत है आखिर क्यों? क्यों जिसे हम गऊ माता कहते है या जो पशु-पक्षी हमें स्वच्छ पर्यावरण देते है वह किस अपराध में भीषण गर्मी, सूखे के दौरान भूख-प्यास से बेमौत मरते है। क्या इस श्राफ से कोई विकास या घोषणा वीर गांव, गली, गरीब, किसान, पीडि़त, वंचित को मुक्ति दिला पायेगा। 
          देखा जाये तो जब भी चुनाव आते है तो कुछ तथाकथित लोग गांव, गली, गरीब, किसान, पीडि़त, वंचित लोगों के वोट हासिल करने कभी उस महान स्वभिमान जीवन को विभिन्न प्रलोभनो जैसे विकास, जनकल्याण, सेवा, राहत के बड़े-बड़े प्रवचन सुना भरमाते है। क्या ऐसे में वोट मांगने वाले लोगोंं से सवाल करना अपराध है, आखिर हम यह क्यों भूल जाते है कि आज जिस भी स्थिति में हम जिन्दा है या अपने परिवारों का भरण-पोषण करते है। यह हमारी कड़ी मेहनत और हमारे पूर्वजों की पुडय़ायी है। न कि किसी का एहसान और न ही किसी की भीख। आज तक जिस तरह से हमने अपने गांव, गली, गरीब, किसान, पीडि़त, वंचितों के जीवन को खुशहाल बनाने जिस तरह से वोट देकर अपनी जबावदेही हर चुनाव में निभायी है वह हमारा कत्र्तव्य ही नहीं, जबावदेही भी है। जिसे हमें मतदान केन्द्र पर पहुंचकर मतदान कर, अवश्य पूरा करना चाहिए। मगर अब वोट देते वक्त यह भी सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि हमारा चुना हुआ जनप्रतिनिधि कैसा हो। क्योंकि आज भी हम गांव, गली, गरीब, किसान, पीडि़त, वंचित परेशान है हमारे बच्चे, शिक्षा, स्वास्थ, पेयजल, सुरक्षा, प्रतिभा, सरंक्षण जैसी सुविधाओं से मोहताज है, जो  किसी भी सभ्य समाज, गांव, गली, नगर के लिये दर्दनाक भी है और शर्मनाक है। इसीलिये हमारा कत्र्तव्य है कि हम वोट देने से पहले वोट मांगने वालो से तीन सवाल अवश्य करे।
पहला सवाल- वोट मांगने वालो से यह पूछा जाने चाहिए कि आपके पास गांव, गली, गरीब, किसान, पीडि़त, वंचित, नगर, कस्बा के विकास, जनकल्याण, सेवा के लिये क्या कार्य योजना है और इससे पूर्व क्या उल्लेखनीय कार्य आपने सार्वजनिक जीवन में किये है। 
दूसरा सवाल- आखिर वोट मांगने वाले से यह होना चाहिए कि आपकी शैक्षणिक, पारिवारिक, सामाजिक और सार्वजनिक योग्यता क्या है? 
तीसरा सवाल- और वोट मांगने वाले से यह होना चाहिए कि आपका-आपके स्वयं, परिवार, गांव, गली, गरीब, नगर, जनपद, जिला, संभाग, प्रदेश, देश, समाज, जन व राष्ट्र कल्याण, विकास तथा निर्माण में अभी तक क्या उल्लेखनीय योगदान रहा।
        अगर इन यक्ष सवालों का जबाव वोट मांगने वालो से सन्तोषप्रद मिलता है तो अवश्य उसे वोट देना चाहिए फिर वह कोई भी प्रत्याशी हो। मगर वोट देने वालो से यह सवाल-जबाव अबश्य करना चाहिए तभी हम इस महान राष्ट्र ही नहीं, गांव, गली के महान नागरिक कहला एक मजबूत लोकतंत्र और राष्ट्र तथा गांव, गली का निर्माण कर, अपने गांव, गली, गरीब, किसान, पीडि़त, वंचितों का जीवन खुशहाल बना पायेगें और चुनावों में एक अच्छा और सच्चा जनप्रतिनिधि चुन पायेगें