फिर मंत्रीविहीन रह गया मुख्यमंत्री के 'सपनों का शहर

Image result for shivraj singh chauhan photo galleryपूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल 03feb 2018 -मंत्रिमंडल विस्तार में एक बार फिर सत्ता-संगठन ने इंदौर से किसी भी विधायक को मंत्री बनाने लायक नहीं समझा। सत्ता और संगठन शहर से एक ही मंत्री बनाने पर अड़ा था। जबकि तगड़ी दावेदारी करने वाले विधायक 'दोनों को मंत्री बना दो'का दबाव भी बना रहे थे, लेकिन न विधायक सुदर्शन गुप्ता मंत्री पद पा सके और न रमेश मेंदोला को मौका मिला। टसल, वर्चस्व और जिद की लड़ाई में मुख्यमंत्री के सपनों का शहर फिर मंत्रीविहीन रह गया।
शुक्रवार को नए मंत्रियों के नामों को लेकर मंथन चला। इंदौर से एक ही मंत्री की शर्त के साथ बात शुरू हुई। लेकिन देर रात तय हो गया था कि इंदौर से इस बार भी किसी को मंत्री नहीं बनाया जाएगा। इस बात के संकेत मंत्री पद की दौड़ में शामिल दोनों विधायकों को भी दे दिए गए थे।
मजबूती से पक्ष रखा, हासिल कुछ नहीं हुआ
विधायक गुप्ता के लिए लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर कोशिशों में जुटे थे। जबकि भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने मेंदोला के लिए मोर्चा संभाल रखा था। पिछली बार भी बात यहीं आकर समाप्त हुई थी कि या तो दोनों को मंत्री बना दो या किसी को नहीं।
भाजपा को रिकॉर्ड देने वाले शहर की अनदेखी क्यों?
प्रदेश का सबसे बड़ा शहर इंदौर भाजपा का सबसे बड़ा वोटबैंक माना जाता है। लोकसभा चुनाव में प्रदेश में सर्वाधिक वोटों से इस शहर ने सांसद सुमित्रा महाजन को जिताया था। वे लगातार एक ही लोकसभा क्षेत्र से आठ बार सासंद रह चुकी हैं। यह भी एक रिकॉर्ड है। विधानसभा चुनाव में प्रदेश में सर्वाधिक वोटों से विधायक मेंदोला ने जीत दिलाई थी। भाजपा के पक्ष में तीन रिकॉर्ड देने वाले शहर की अनदेखी अब शहरवासियों को भी नागवार लग रही है।
इंदौर से मंत्री बनाना भाजपा के लिए ही होता फायदेमंद
यदि मंत्रिमंडल विस्तार में इंदौर से किसी भी विधायक को जगह मिलती तो इसका फायदा पार्टी को होता। विजयवर्गीय के मंत्री पद से हटने और केंद्र की राजनीति में जाने के बाद भाजपा की ग्रामीण राजनीति में दमदार चेहरा अभी तक तैयार नहीं हो पाया है। एक समय था जब भेरूलाल पाटीदार, निर्भय सिंह पटेल और प्रकाश सोनकर जैसे नेताओं ने ग्रामीण इलाकों में भाजपा की स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। पार्टी ने तीनों को मंत्री पद भी दिए थे, लेकिन अब संगठन ने न ग्रामीण इलाके को तवज्जो दी न शहरी को। जबकि पार्टी के ही अंदरूनी सर्वे में जिले की दो ग्रामीण सीटों पर भाजपा की स्थिति कमजोर है।
सपनों पर तो अपना ही अधिकार होता है
इंदौर मुख्यमंत्री के सपनों का शहर है। सपने पर उसी का अधिकार होता है जो उसे देखता है। स्वप्नदृष्टा को यह मंजूर नहीं होता कि कोई उसके सपने में दखल दे। इंदौर में स्वप्न में दखल देने वाले बहुत से लोग हैं, जिसकी वजह से स्वप्नदृष्टा के सपने में खलल पड़ रहा है और शहर प्रतिनिधित्व से वंचित हो रहा है। पूरा मामला स्वीकारोक्ति और अस्वीकारोक्ति का है। इंदौर इसी में पिस रहा है। इससे पार्टी-संगठन और शहर तीनों को नुकसान होता है।
- सत्यनारायण सत्तन, पूर्व विधायक व वरिष्ठ भाजपा नेता