हाईकोर्ट नहीं करेगा अवैध नियुक्तियों के मामले की निगरानी

mp highcourt 15 02 2018पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल 16feb 2018 - प्रदेश में हुई अवैध नियुक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की नियमित निगरानी अब हाईकोर्ट नहीं करेगा। सरकार को हर माह कोर्ट में कार्रवाई का प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होता था।
अवैध नियुक्तियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई पर संतुष्टि जताते हुए यह व्यवस्था दी गई है। प्रदेश में करीब 516 नियुक्ति अवैध पाई गई थीं। इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। बताया जा रहा है कि 22 विभागों में भर्ती नियमों को ताक पर रखकर नियुक्ति दिए जाने के मामले सामने आए थे।
रीवा के मनसुखलाल सराफ की याचिका पर वर्ष 2015 में नोटशीट के आधार पर जल संसाधन विभाग में उपयंत्री बने अरुण तिवारी की नियुक्ति को अवैध करार दिया गया था। इसके साथ ही भर्ती नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियों के मामले की नियमित निगरानी शुरू कर दी थी।
इसमें सरकार को हर माह कोर्ट में प्रतिवेदन देना होता था। सितंबर 2017 में सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों से 2015 के पहले नियम विरुद्ध नियुक्तियों और उसके खिलाफ कार्रवाई का ब्योरा मांगा था। करीब 22 विभागों में गड़बड़ियां सामने आईं।
कुछ विभागों ने तो गलत नियुक्तियों को निरस्त कर दिया तो कुछ सेवानिवृत्त हो गए। विभाग ने यह रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत की। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कोर्ट ने शासन की ओर से की जा रही कार्रवाई से संतुष्टि जताते हुए इसे जारी रखने के निर्देश देते हुए नियमित निगरानी समाप्त कर दी।
विधानसभा की अवैध नियुक्तियों पर पेश हो चुका चालान
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में विधानसभा सचिवालय में हुई अवैध नियुक्ति को लेकर एसआईटी जांच कर कोर्ट में चालान प्रस्तुत कर चुकी है।
जस्टिस शचींद्र द्विवेदी ने इस मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके आधार पर जहांगीराबाद थाने में विधानसभा सचिवालय के उप सचिव ने एफआईआर दर्ज कराई थी। नियम विरुद्ध नौकरी पाने वालों में अधिकांश के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है।