पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली -दिल्ली के मुख्य सचिव के साथ आप नेताओं की बर्बरता ने देश की राजधानी की राजनीतिक मर्यादा को तार-तार कर दिया है। खुद नौकरशाह रह चुके मुख्यमंत्री के सामने एक नौकरशाह के साथ ओछी हरकत बर्दाश्त से परे है। हालांकि अधिकारियों के साथ टकराव का सिलसिला तो आप सरकार बनने के तीन महीने के बाद ही शुरू हो गया था। चाहे वह पूर्व मुख्य सचिव केके शर्मा हों या फिर एमएम कुट्टी। आप सरकार में जितने नौकरशाह स्टडी लीव पर गए, शायद ही पिछली सरकारों के कार्यकाल में गए होंगे।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 14 फरवरी 2015 को दिल्ली सरकार का कामकाज संभाला था। कुछ ही दिन बाद मनमाने ढंग से कार्य कराने को लेकर अधिकारियों से विवाद होने लगे। यह विवाद उस समय ज्यादा बढ़ गया जब तत्कालीन मुख्य सचिव केके शर्मा दस दिनों की छुट्टी पर चले गए थे। शर्मा की उपस्थिति में दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग ने 15 मई 2015 को आदेश जारी करके ऊर्जा विभाग में प्रमुख सचिव का कार्य देख रहीं शकुंतला गैमलीन को 14 मई से 24 मई 2015 तक कार्यवाहक मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया।
इसके बाद तो केजरीवाल सरकार ने तीर कमान से बाहर निकाल लिया। अब खुलकर अधिकारियों के खिलाफ बयानबाजी होने लगी। हद तो तब हो गई जब सेवा विभाग के प्रमुख सचिव अनिंदो मजूमदार के दफ्तर पर ताला जड़ दिया गया। इसके बाद 9 जून 2015 को दिल्ली सरकार ने गृह विभाग के प्रधान सचिव धर्मपाल का तबादला कर दिया और अपने चहेते नौकरशाह राजेंद्र कुमार को जिम्मेदारी दे दी। दरअसल, धर्मपाल ने मुकेश कुमार मीणा को दिल्ली की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) का प्रमुख बना दिया था। इस बात से आगबबूला हुई दिल्ली सरकार ने उपराज्यपाल के आदेश को दरकिनार कर उनका तबादला कर दिया।
पहले भी नाराज अधिकारी जा चुके हैं हड़ताल पर
30 दिसंबर 2015 को मंत्री सत्येंद्र जैन ने गृह विभाग के दो अधिकारी विशेष सचिव (कारागार) सुभाष चंद्रा, और विशेष सचिव (अभियोजन) को निलंबित कर दिया था। अधिकारियों का कहना था कि जैन ने विशेष सचिवों के वेतन बढ़ाने की फाइल साइन करने का दबाव बनाया था, जिसे अधिकारियों ने मना कर दिया था। जिसके बाद दिल्ली सरकार के सभी अधिकारी हड़ताल पर चले गए थे।
दबाव में नही आए अधिकारी, कराया तबादला
दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग में प्रमुख सचिव रहे अश्वनी कुमार को भी पिछले वर्ष जुलाई माह में सरकार ने निशाने पर लिया था। इसके बाद अश्वनी कुमार ने उपराज्यपाल से तबादले का आग्रह किया था जिसके बाद उनका तबादला हो गया था। इसी तरह दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रहे वरिष्ठ नौकरशाह केशव चंद्रा का उस समय के जल मंत्री रहे राजेंद्र पाल गौतम से विवाद बढ़ गया था, जिसके चलते उनका भी तबादला केंद्र सरकार में हो गया।

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