राजस्थान सरकार ने जजों और लोकसेवकों को भ्रष्टाचार की जांच से बचाने वाला अध्यादेश वापस लिया

राजस्थान सरकार ने जजों और लोकसेवकों को भ्रष्टाचार की जांच से बचाने वाला अध्यादेश वापस लियापूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ जयपुर -राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने न्यायाधीशों और लोक सेवकों को भ्रष्टाचार की जांच से बचाने वाला विवादित अध्यादेश वापस ले लिया है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सोमवार को राज्य सरकार ने इसे वापस लेने की घोषणा की. विधानसभा में बजट पर बहस के दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा, ‘बिल को हमने सलैक्ट (प्रवर) समिति को रेफर कर दिया. हमने ही अध्यादेश को लैप्स होने दिया. जब कानून ही नहीं बना तो हम क्या वापस लें. जो भी हो.. हम सलैक्ट कमेटी से इसे वापस ले रहे हैं.’
बीते अक्टूबर में लाए गए इस अध्यादेश में राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बगैर मौजूदा और पूर्व जजों, मजिस्ट्रेटों और लोक सेवकों के खिलाफ जांच करने पर पाबंदी लगाई गई थी. यह रोक छह महीने तक के लिए थी. इसमें यह भी कहा गया था कि इस रोक के दौरान सरकार की मंजूरी के बगैर संबंधित लोकसेवक के खिलाफ कुछ भी प्रकाशित करना भी अपराध होगा और इसके लिए दो साल तक की कैद की सज़ा हो सकती है. भाजपा के कई विधायकों ने भी इस अध्यादेश की आलोचना की थी. इससे बैकफुट पर आई सरकार ने इसे प्रवर समिति को भेज दिया था.
बिल वापस लिए जाने पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा, ‘यह बहुत पहले किया जाना चाहिए था. मैं हैरान हूं कि राज्य और देश में बिल का विरोध होने के बावजूद सरकार इस पर लंबे वक्त तक अड़ी रही. मैं खुश हूं कि बिल वापस ले लिया गया है लेकिन इसने राज्य की छवि को नुकसान पहुंचाया है और भाजपा सरकार का घमंड दिखाया है.’