पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली 20 Jan 2018 -दावोस में होने वाले डब्लूईएफ सम्मेलन से पहले पीएम मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने दुनिया पर अपनी छाप छोड़ी है और अब जरूरत उसका लाभ उठाने की है। भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और सभी रेटिंग एजेंसियों समेत दुनियाभर ने इसे मान्यता दी है। "दावोस" भारत के लिए बेहतरीन अवसर है क्योंकि देश के पास एक बड़ा बाजार और जनसांख्यिकीय ताकत है।
सम्मेलन के लिए पहली बार दावोस जाने से पहले प्रधानमंत्री ने एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि भारत की नीतियों और विकास क्षमताओं के बारे में दुनिया सीधे उसके मुखिया से सुनना चाहती है। विश्व आर्थिक मंच (डब्लूईएफ) सम्मेलन में 125 करोड़ भारतीयों की सफलता की कहानी सुनाने में उन्हें बेहद गर्व होगा। प्रधानमंत्री 23 जनवरी को सम्मेलन में उद्घाटन भाषण देंगे। यह पहला मौका होगा जब डब्लूईएफ सम्मेलन की शुरुआत भारतीय प्रधानमंत्री के भाषण से होगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) में बड़ा उछाल आया है। यह स्वाभाविक है कि दुनिया भारत से सीधे बात करना चाहती है। दावोस सम्मेलन को वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े उद्योगपतियों, वित्तीय संस्थाओं और नीतिनिर्धारकों की सभा करार देते हुए मोदी ने कहा कि वह अब तक वहां नहीं जा सके।
एक साथ हों लोस-विस चुनाव
लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्सवों की तरह चुनावों की तारीखें भी फिक्स होनी चाहिए ताकि राजनेताओं और नौकरशाहों को पूरे साल चुनाव प्रचार और चुनाव कराने में व्यस्त न रहना पड़े। सभी चुनावों के लिए उन्होंने एक ही मतदाता सूची की भी वकालत की।
जातीय राजनीति का इतिहास दुर्भाग्यपूर्ण
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि इसका जातिगत राजनीति का इतिहास रहा है। लेकिन उनकी सरकार का मंत्र सिर्फ विकास है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा
- मैं सामान्य इंसान हूं, सारे प्रोटोकॉल नहीं जानता हूं।
- सवा सौ करोड़ देशवासियों को अपने अंदर जीता हूं।
- देशवासियों की इच्छाशक्ति बहुत अहम।
- आपको दुनिया के सामने अपने वजूद का अहसास कराना होगा।
- विश्व ने देखा कि हम अलग सोच वाली अलग सरकार हैं।
- ग्लोबल वामिर्ग के मुद्दे पर भारत की निर्णायक भूमिका।
- हमने अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर आतंकवाद की बात को उठाया।
- आलोचना को अवसर में बदलना मेरा स्वभाव
- आर्थिक, सामाजिक दृष्टि से गुड गवनेर्स की ओर ठोस कदम।
- हम देश के लोगों को मुख्यधारा में लाने में सफल रहे।
- बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद भी 30-40 फीसद लोग बैंकिंग में नहीं थे।
- आगामी बजट पर कहा, विकास किया है, विकास करेंगे।

Post a Comment