मध्य प्रदेश: CM प्रत्याशी घोषित करने से पार्टी में पड़ेगी फूट- बाबरिया

पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल Jan 20 , 2018,बाबरिया ने कहा है कि कांग्रेस को डर है कि अगर उसने मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित किया तो पार्टी में गोलबंदी और बढ़ जाएगी। उसे यह भी लगता है कि चेहरा घोषित करने की मांग के पीछे बीजेपी का हाथ है। उधर पार्टी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि मुख्यमंत्री पद के लिये नाम चुनाव से पहले घोषित होना चाहिये।                                                                                                                                          fraction in congress party by declaring cm candidate says babaria
शुक्रवार को भोपाल में प्रदेश कांग्रेस की बैठक हुई। इसमें प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया भी शामिल हुये। बैठक के दौरान ही कुछ वरिष्ठ नेताओं ने चेहरा घोषित किये जाने की मांग की।बाद दीपक बाबरिया ने मीडिया से कहा-जब समय आएगा तब हम नेता का नाम बताएंगे। 

उन्होंने कहा कि बीजेपी हमारी पार्टी में फूट डालने की कोशिश कर रही है। इसलिए वह चेहरा घोषित करबाने की मांग उठवा रही है। हम उसके गेम प्लान को समझते हैं, इसलिये अभी इस सवाल का उत्तर नहीं देंगे। लेकिन जब उनसे यह पूछा गया कि वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह मांग उठाई है तो उन्होंने कहा कि यह उनकी अपनी राय हो सकती है। 

दीपक बाबरिया ने कहा कि हम प्रदेश कांग्रेस का पुनर्गठन करने जा रहे हैं। इसके लिये ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है। उसे आज लांच भी कर दिया है। उन्होंने यह दावा भी किया कि अब मध्य प्रदेश कांग्रेस पूरी एकता के साथ काम करेगी। विधानसभा चुनाव से पहले पूरे प्रदेश में 2200 सभाएं की जाएंगी। 

उधर आंतरिक सूत्रों का कहना है कि आज बैठक के दौरान करीब आधा दर्जन विधायकों ने चुनाव से पहले चेहरा घोषित करने की मांग की, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने यह कह कर बात टाल दी कि कांग्रेस में नेता घोषित करने की परंपरा नही है। इन सूत्रों का यह भी कहना है कि अरुण यादव ज्योतिरादित्य सिंधिया का विरोध कर रहे हैं। इसलिए जब जब सिंधिया ने नेता घोषित करने की बात कही तब तब उन्होंने उसका विरोध किया। 

दरअसल अरुण यादव को लगता है कि प्रदेश अध्यक्ष के नाते वे मुख्यमंत्री पद के स्वाभाविक दावेदार होंगे। इसलिए वह नहीं चाहते कि कोई चेहरा घोषित किया जाए। अरुण यादव 2014 का लोकसभा चुनाव हारे थे। उनके सामने पहचान का संकट है। उन्हें अध्यक्ष पद पिछड़े वर्ग के कोटे से मिला है। उनकी सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि उन्हें कोई नेता नहीं मानता है। 

इसके साथ ही कहा यह भी जा रहा है कि अगले कुछ दिन में राहुल गांधी मध्य प्रदेश के लिये नई टीम का ऐलान कर सकते हैं। वरिष्ठ नेता कमलनाथ भी चाहते हैं चुनाव नए चेहरों पर लड़ा जाये। वह खुद भी कमान संभालने के इच्छुक हैं। कांग्रेस प्रदेश में 2003 से लगातार हार रही है। फिलहाल उसके 3 सांसद और 58 विधायक हैं।