पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ भोपाल 17 Jan 2018 -इंदौर में स्कूल बस हादसे के बाद सक्रिय हुए परिवहन विभाग की सख्ती के खिलाफ हड़ताल पर उतरे ट्रांसपोर्टरों को सरकार किसी भी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं है। परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने दो-टूक कहा कि 15 साल पुरानी बसों को किसी भी सूरत में नहीं चलने देंगे। बच्चों की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है।
सिंह ने स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह को पत्र लिखकर मान्यता नियम में स्वयं की बस की शर्त जोड़ने के लिए कहा है। साथ ही कहा है कि जिन स्कूलों के पास स्वयं की बस नहीं हैं, उनकी मान्यता समाप्त की जाए। ट्रांसपोर्टर हड़ताल पर अड़े रहे तो सरकार बसों का अधिग्रहण भी कर सकती है।
मंत्रालय में मीडिया से चर्चा के दौरान परिवहन मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से सड़क दुर्घटनाओं के जो मामले सामने आए हैं, उसे ध्यान में रखते हुए तय किया है कि 15 साल पुराने वाहन नहीं चलने दिए जाएंगे। इन्हें फिटनेस सर्टिफिकेट भी नहीं दिया जाएगा।
कुछ राज्यों में तो 10 साल पुराने वाहनों को भी चलाने की इजाजत नहीं है। प्रदेश सरकार बस ऑपरेटरों से कोई टैक्स नहीं लेती है। कई तरह की सुविधाएं इन्हें दी गई हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और निर्देशों का पालन करना होगा। स्कूल बसों को लेकर उन्होंने कहा कि इसमें परिवहन विभाग से ज्यादा भूमिका स्कूल शिक्षा विभाग की है।
स्कूलों को मान्यता तभी देनी चाहिए, जब उनकी स्वयं की बस हों। यदि बस न हो तो मान्यता ही न दी जाए। जिनके पास छात्रों को लाने और वापस भेजने बस न हो, उनकी मान्यता रद्द की जाए। वैसे भी मोटर व्हीकल एक्ट में प्रावधान है कि स्कूल बस का परमिट हम तभी दे सकते हैं जब स्कूल का बस संचालक के साथ करार हो। यह करार कोई भी नहीं करता है। हजारों गाड़ियां बिना परमिट चल रही हैं। तय किया गया है कि अब अवैध गाड़ियों को नहीं चलने देंगे।
स्कूलों की मान्यता के साथ बस की अनिवार्यता की शर्त जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा करने के साथ स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह को पत्र भी लिखा है। ट्रांसपोर्टरों के हड़ताल पर रहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम जो वैधानिक कार्यवाही हो सकती है, वह करेंगे। यदि समस्या ज्यादा बढ़ती है तो बसों का अधिग्रहण भी किया जा सकता है।
भोपाल में चल रहे हैं आठ हजार अवैध मैजिक व वैन
एक सवाल के जवाब में परिवहन मंत्री ने कहा कि अकेले भोपाल शहर में आठ हजार मैजिक और वैन अवैध रूप से चल रही हैं। इसके लिए स्कूल भी जिम्मेदार हैं। कानूनी तौर पर ये करार नहीं करते हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को असुरक्षित वाहनों में नहीं भेजें।

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