पूनम पुरोहित मंथन न्यूज़ दिल्ली -हाल के दिनों में दुश्मन देशों को लेकर बेबाक बयान देने के लिए चर्चित सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत बुधवार को भी पुराने अंदाज में थे। वैश्विक कूटनीतिक स्थिति पर भारत में होने वाले सबसे बड़े आयोजन "रायसीना डायलॉग" में आर्मी चीफ के निशाने पर फिर पाकिस्तान था। हाल के दिनों में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ कई कार्रवाई किए जाने के बीच जनरल रावत ने कहा कि अगर कोई देश आतंकवाद से पीड़ित है, तो उसके खात्मे के लिए उसे खुद कदम उठाना होगा।
परोक्ष रूप से उन्होंने संकेत दे दिया कि जरूरी हुआ तो सीमा पार कर आतंकियों को खत्म करने से भारत पीछे नहीं हटेगा। दुनिया के कुछ दिग्गज रणनीतिकारों के साथ बैठे जनरल रावत ने पाकिस्तान का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनकी भाषा से साफ था कि वह किसके लिए इन शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आतंकियों के हाथ परमाणु हथियारों के पड़ने के आसार को भी उन्होंने बेहद चिंताजनक बताया।
रावत ने कहा कि आतंकी संगठनों के साथ ही आतंक का समर्थन करने वाले देश के खिलाफ भी कार्रवाई करनी होगी। एक बार कोई यह पहचान कर लेता है कि कौन सा देश आतंकियों और आतंकी संगठनों की मदद कर रहा है, तो फिर कार्रवाई खुद करनी होगी। कोई दूसरा देश मदद नहीं करेगा। हमें खुद यह काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि इसी तरह से आतंकियों की मदद करने वाले देशों को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय मदद पर भी रोक लगनी चाहिए। आतंकी भी अपना चेहरा बदल रहे हैं। एक तरफ वे हिंसक रास्ता अपना रहे हैं, तो दूसरी तरफ राजनीतिक तौर पर भी अपने उद्देश्यों के तहत आगे बढ़ रहे हैं। हमें इन दोनों मोर्चों पर कार्रवाई करनी होगी। रावत ने आतंक के मौजूदा स्वरूप के पूरी मानवता के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि इसके खिलाफ कई मोर्चे पर कदम उठाना होगा।
सेना प्रमुख ने आतंक पर रोकथाम के लिए सोशल मीडिया पर भी अस्थायी रूप से रोक लगाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "यह कहना अभी अलोकतांत्रिक लग सकता है। लेकिन हमें यह देखना होगा कि हम शांतिपूर्ण माहौल में रहना चाहते हैं या नहीं और आतंकवाद के खात्मे के लिए कुछ समय के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने के लिए तैयार होते हैं या नहीं।"
हक्कानी ने भी पाक को घेरा
रावत के बाद अमेरिका में रह रहे पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक हुसैन हक्कानी का संबोधन हुआ। उन्होंने भी आतंकवाद पर पाकिस्तान सरकार के दोहरे चरित्र की न सिर्फ आलोचना की बल्कि इसे स्वयं पाकिस्तान के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा करार दिया। खास तौर पर जिस तरह से मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद को वहां की सरकार बचा रही है, इस पर हक्कानी ने पाकिस्तान सरकार को जम कर आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार को हाफिज सईद जैसे आतंकी पर लगाम लगाने और उसे मुंबई हमले का दोषी मानते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। पाक सरकार कहती है कि सईद के खिलाफ कोई केस नहीं चल रहा है। जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसके खिलाफ साक्ष्य दे रहा है। ऐसे में पाक सरकार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बात करनी चाहिए।
आतंक के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस समय की जरूरत : सुषमा
"रायसीना डायलॉग" में हिस्सा लेने आए तमाम विदेशी कूटनीतिक विशेषज्ञों, मंत्रियों और रणनीतिकारों को भारत ने एक स्वर में यह संदेश दिया कि आतंकवाद के खिलाफ वह अब बहुत ज्यादा सहन करने को तैयार नहीं है। एक तरफ सेना प्रमुख ने साफ संकेत दिया कि भारत जरूरत पड़ने पर आतंकियों के खिलाफ हरसंभव कार्रवाई करेगा, तो दूसरी तरफ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी कहा कि अभी आतंकवाद पर जीरो-टॉलरेंस वक्त की जरूरत है।
सुषमा ने आतंक को अभी दुनिया में तमाम विघटनकारी घटनाओं का सबसे बड़ा जरिया बताते हुए कहा कि कुछ देश मानते हैं कि आतंकवाद को समर्थन देने की नीति वे अब भी जारी रख सकते हैं।
स्वराज ने कहा कि पिछले कुछ दशकों से आम जनता के जीवन में जिस तरह से डिजिटल माध्यम ने प्रवेश किया है, उसे देखते हुए आतंकवाद की चुनौतियां और बढ़ गई हैं। कट्टरपन बढ़ने के सारे सुबूत मिल रहे हैं। आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर और मजबूत सामंजस्य बनाना होगा। इसी तरह से परमाणु हथियारों व तकनीक की चोरी के खिलाफ भी देशों को समग्र तौर पर कदम उठाने होंगे। स्वराज ने हथियारों के गैर कानूनी कारोबार को लेकर सांकेतिक भाषा में पाकिस्तान और उत्तर कोरिया के संबंधों की तरफ इशारा किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में कई तरह की जो घटनाएं सामने आ रही हैं, उसके जड़ में हथियारों का गलत कारोबार ही है। लेकिन विश्व बिरादरी इसे काफी समय तक नजरअंदाज करती रही। सनद रहे कि भारत पहले भी कहता रहा है कि उत्तर कोरिया को कहां से परमाणु बम बनाने की तकनीकी मिली है उसकी जांच होनी चाहिए। कई लोग यह मानते हैं कि उत्तर कोरिया को यह तकनीक पाकिस्तान से ही मिली है।
विश्व बिरादरी के सामने भारत ने यह भी संकेत दिया कि कनेक्टिविटी के मुद्दे पर वह अपनी सीमित क्षमता के बावजूद एक बड़ी भूमिका निभाने को तैयार है। स्वराज ने अफगानिस्तान की मदद के लिए चाबहार पोर्ट बनाने या एयर कारिडोर शुरू करने के अलावा भारत से म्यांमार-थाईलैंड तक सड़क मार्ग बनाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि म्यांमार-थाईलैंड तक बनने वाली सड़क आने वाले दिनों में पूरे आसियान को जोड़ने वाली साबित हो सकती है। नई नार्थ-साउथ कारिडोर भारत को ईरान और यूरोप से जोड़ने वाला साबित हो सकता है। लेकिन स्वराज भारत की कनेक्टिविटी परियोजनाओं का जिक्र करते हुए यह कहना नहीं भूलीं कि इन परियोजनाओं के साथ दूसरे देशों की संप्रभुता और उनकी भौगोलिक अखंडता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। सनद रहे कि भारत चीन की "वन बेल्ट वन रोड" परियोजना का इस तर्ज पर विरोध करता है कि वह हमारी भौगोलिक संप्रभुता का सम्मान नहीं करता है।

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